श्री भगवान वैद्य प्रखर

? मराठी कविता ?

कविता तुम्हारे लिए… – उज्ज्वला केळकर ☆ हिन्दी भावानुवाद – श्री भगवान वैद्य ‘प्रखर’

उज्ज्वला केळकर

यह कविता तुम्हारी 

तुम्हारे लिए

सामने बरसता धुआंधार पानी

सम्पुष्ट कर रहा है

रोम-रोम में बोया गया

तुम्हारा स्पर्श …

घर ने कब का नकार दिया मुझे

मंदिर भी नहीं कोई निगाह में

या कोई धर्मशाला, जर्जर ही सही

 

नीला आकाश

रूठकर दूर चला गया है मुझसे

धूप का छोटा-सा टुकड़ा भी नहीं

उष्मा के लिए

इस दिशाहीन सफर में साथ हैं

तुम्हारी अनगिनत यादें

और…अब…

उनकी छितरी हुईं कविताएं…।

** 

 मूल कविता – -उज्ज्वला  केळकर

संपर्क – निलगिरी, सी-५ , बिल्डिंग नं २९, ०-३  सेक्टर – ५, सी. बी. डी. –  नवी मुंबई , पिन – ४००६१४ महाराष्ट्र

भावानुवाद  श्री भगवान वैद्य ‘प्रखर’

30, गुरुछाया कालोनी, साईंनगर, अमरावती  444607

संपर्क : मो. 9422856767, 8971063051  * E-mailvaidyabhagwan23@gmail.com *  web-sitehttp://sites.google.com/view/bhagwan-vaidya

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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