डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – अवसाद)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३२० – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – अवसाद ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

कठिन राह में आपको,आया सूरज  याद।

क्लेश मिटेंगे आपके, पूरी हर मुराद।।

 *

लगी  तपन तो धूप की, बरस रहे अंगार।

छाँव नहीं है तनिक भी, बढ़े ताप का ज्वार ।।

 *

बयार चले बैसाख की, झुलस रहे हरियाल।

तेज धूप के पाँव है,बुरा हो रहा हाल।।

 *

तेरे तेवर देखकर, कैसे करें संवाद।

मन की बातें रह गई,अधरों के अवसाद।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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