आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका गीत – ममता के गाँव में…)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २७९ ☆

☆ गीत – ममता के गाँव में… ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

.

नेह नर्मदा कलकल बहती

शीतल अस्थि हुई हर दहती

कलकल करती लहर-लहर हँस-

श्वेत-श्याम पत्थर से कहती

कंकर को शंकर कर दूँ मैं

मेरा रहना

अमरकंटकी ठाँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

.

सरला तरला मेरी धारा

पग-पग मठ मंदिर गुरुद्वारा

धुनी रमाए तीर कबीरा-

बंबुलिया दस दिश गुंजारा।

बहा पसीना

लक्ष्य मिलेगा पाँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

.

वन-वन में भटके रघुवीर

दीन-दुखी की हर ली पीर

कान्हा पांडव का वनवास-

कहता चुके न संयम-धीर।

द्रुपद-सुता हर रक्षित

स्नेहिल दाँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

.

धान-कटोरा भरे बिलासा

बैलाडीला रहे न प्यासा

बमलेश्वरि-दंतेश्वरि की जय-

राम ते अधिक राम का दासा

जन-मन रमता

गौ-गौरैया-काँव में,

मेरा बसना है

ममता के गाँव में…

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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