श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # २०५ ☆

☆ गीत ।। उदाहरण पेश करके नहीं उदाहरण बन कर दिखाओ ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

उदाहरण पेश कर नहीं उदाहरण बन कर दिखाओ।

चुनौती के सामने तुम अपना   सीना तन कर दिखाओ।।

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मत रोको कोशिशअगली बार सफलता मिल सकती है।

निरंतर अभ्यास से चट्टान पत्थर की भी   हिल सकती है।।

केवल कथनी नहीं तुम इसे आचरण में रंग कर दिखाओ।

उदाहरण पेश कर नहीं उदाहरण बन कर दिखाओ।।

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वह झरना भी कैसा झरना जो पत्थर से न टकराता हो।

वही आदमी साहसी जो मुश्किल में भी न घबराता हो।।

आगेबढ़ नेतृत्व क्षमता आवरण में उतर  कर दिखाओ।

उदाहरण पेश कर नहीं उदाहरण बन कर दिखाओ।।

***

जब हम सामने बढ़ चलते हैं तो कारवां पीछे आता है।

जो संघर्ष से परिचित   होता  वह ही चर्चित हो पाता है।।

वही होगी सच्ची सेवा किसीके दुखहरण बनकर दिखाओ।

उदाहरण पेश कर नहीं उदाहरण बन कर दिखाओ।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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