श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १८३ ☆ देश-परदेश – सांप निकलने पर लकीर पीटना ☆ श्री राकेश कुमार ☆

उपरोक्त कहावत का चलन सबसे अधिक हमारे देश में ही होता है। अंग्रेज़ी की कहावत “Prevention is better than Cure” का सदुपयोग पश्चिम के देशों में ही होता है।

देश के किसी भी भाग में कोई आपदा आने से पूर्व कभी कोई तैयारी नहीं होती है। दुर्घटना हो जाने के बाद मात्र कुछ घंटों/ दिनों के लिए हम लोग विश्व के किसी भी देश से अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इस सक्रियता का दसवां हिस्सा भी हम आपदा पूर्व तैयारी में खर्च कर देवें,  तो देश दुर्घटना रहित हो सकता है।

गर्मी के मौसम में आग लगना आम बात होती है। व्यवस्था को दोष मढ़ कर हमारा कार्य पूर्ण हो जाता है। अभी लखनऊ आग की लपटों में ताप बाकी है, मुंबई की पहली वर्षा ने ही समस्याओं का विकराल रूप सामने खड़ा कर दिया है।

किसी भी व्यवस्था के नियमों का पालन ना करने की हमारी आदत, घर से ही आरंभ हो जाती है। सोने के नियत स्थान पर भोजन ग्रहण करना हो या रोज मर्रा के तय नियमों की अनदेखी करना।

पहली बार जब आप कोई भी नियम का उल्लंघन करते हैं, उस दिन के बाद से ही आपके स्वभाव और आदतों में “अनुशासनहीनता” जन्म ले लेती है।

हम स्वयं भी बहुत सारे नियम तोड़ कर जीवन के कष्ट भोग रहें हैं। कॉलेज में मित्र के कहने पर जीवन में जब मदिरा का पहला प्याला ये कहकर उठाया था, कि बस आज पहली और आखिरी बार है। तब स्वयं ली गई प्रतिज्ञा टूट गई थी, उसके बाद हम उसके आसरे से ही, जी पा रहें है। स्वास्थ्य पर इसके विपरीत प्रभाव के हम सब अच्छे खासे जानकार हैं।

होटल में जब कभी छोटे समूह में जाते हैं, तो उस होटल के टेबल कुर्सी आदि को हम अपनी संख्या से लगवा लेते हैं। इससे वहां अव्यवस्था होती है, लेकिन हमको उससे क्या लेना देना?

जब तक हम स्वयं तय शुदा नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं करते हैं, तब प्रशासन, काम काज आदि के क्षेत्र में अनुशासन की उम्मीद करना बेमानी होगी।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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