श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘बुरा न मान जाए…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १२५ ☆
☆ बुरा न मान जाए… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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वो उसे कुछ लिखना चाहता है,
लिखता है, पर पसंद नहीं आता,
लिख कर, फिर मिटा देता है,
कई विचार आते हैं, लिखता है,
पसंद नहीं आता, मिटा देता है,
सोचता क्या लिखे, नाराज न हो,
पढ़कर बुरा न मान जाए।
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शब्दों का संयोजन, संतुलित हो,
उसकी बात समझे, नाराज न हो,
मन में बहुत कुछ है लिखने को,
कागज पर शब्द उभर नहीं पाते,
मन में विचार तो बहुत आते हैं,
मन से बाहर, निखर नहीं पाते,
अपने मन का हो, या उसके मन का,
मन का भाव, समझ तो पाए,
सोचता क्या लिखे, नाराज न हो,
पढ़कर बुरा न मान जाए।
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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