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English Literature – New Book ☆ NIRVANA – The Highest Happiness: Be A BUDDHA in the modern world ☆ Mr. Jagat Singh Bisht

☆ NIRVANA – The Highest Happiness: Be A BUDDHA in the modern world ☆ Mr. Jagat Singh Bisht ☆  I am happy to share with the readers and writers of e-abhivyakti that my fourth book NIRVANA – The Highest Happiness: Be A BUDDHA in the modern world is available on Amazon. Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.) In this book, you will find simple, effortless, and painless practices for authentic happiness, stress management, and lasting peace. These exercises are easy to do, can be taken up by anyone, and require no previous training or experience. About the book: The Buddha taught the Dhamma – the law of nature, the path of truth -about two thousand and five hundred years ago. A lot of time has since elapsed, and much water has flown down the rivers. The whole world has changed drastically but the guiding principles of spirituality remain the same. The Buddha understood that this world is in turmoil....
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English Literature – New Book ☆ A FLOURISHING LIFE: Effortless Practices for Happiness and Stress Management ☆ Mr. Jagat Singh Bisht

☆ A FLOURISHING LIFE: Effortless Practices for Happiness and Stress Management ☆  I am happy to share with the readers and writers of e-abhivyakti that my third book A FLOURISHING LIFE: Effortless Practices for Happiness and Stress Management on Amazon on the International Day of Hapiness. Shri Jagat Singh Bisht (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.) In this book, you will find simple, effortless, and painless practices for authentic happiness, stress management, and lasting peace. These exercises are easy to do, can be taken up by anyone, and require no previous training or experience. About the book: Do you want to be happier? Would you like to increase your well-being and flourish? This book will help you flourish! Flourishing is the experience of life going well - a combination of feeling good and functioning effectively. It is the opposite of languishing - living a life that feels hollow and empty. Everyone seeks a flourishing life, but...
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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हे शब्द अंतरीचे # 35 ☆ अनुभुती… ☆ कवी राज शास्त्री

कवी राज शास्त्री ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हे शब्द अंतरीचे # 35 ☆  ☆ अनुभुती… ☆   स्वतःच्या चुकीतून बोध घ्यावा मनुष्याने नेहमी सतर्कता बाळगावी मनुष्याने…!   चुकीतूनच हुशार होतो पहा मनुष्य स्वतःअनुभुती घेता सुज्ञही होतो मनुष्य…!   © कवी म.मुकुंदराज शास्त्री उपाख्य कवी राज शास्त्री. श्री पंचकृष्ण आश्रम चिंचभुवन, वर्धा रोड नागपूर – 440005 मोबाईल ~9405403117, ~8390345500 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित ≈...
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English Literature – New Book ☆ THE LITTLE BOOK OF HAPPINESS: Simple ways to Beautify your Life ☆ Mr. Jagat Singh Bisht

☆ THE LITTLE BOOK OF HAPPINESS: Simple ways to Beautify your Life – By Jagat Singh Bisht ☆ I am happy to share with the readers and writers of e-abhivyakti that I have published a book THE LITTLE BOOK OF HAPPINESS: Simple ways to Beautify your Life on Amazon.  About the book: This book is about simple ways to beautify your life. You can create your own happiness. It is hassle-free and you can do it yourself. This book describes activities derived from the modern science of happiness as well as ancient spirituality, based on years of study and practical sessions with people. You will learn about flow, work-happiness, mindfulness, laughter meditation, and happiness activities. There are beautiful parables and inspirational quotes inside. You can experience new joy and freedom on reading the book. Preview of the book: This is a free preview of the book. Just click on the link, then the book cover, and flip through the pages. You can read from the pages of the book: Amazon...
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English Literature – New Book ☆ CULTIVATING HAPPINESS: A Guide to Practices that do Wonders ☆ Mr. Jagat Singh Bisht

☆ CULTIVATING HAPPINESS: A Guide to Practices that do Wonders - By Jagat Singh Bisht ☆ I am happy to share with the readers and writers of e-abhivyakti that I have published a book CULTIVATING HAPPINESS: A Guide to Practices that do Wonders on Amazon. Below you will find basic information about the book and you can also preview some chapters of the book. A short video about the book: (Mr. Jagat Singh Bisht) YouTube Link  >>>  CULTIVATING HAPPINESS: A GUIDE TO PRACTICES THAT DO WONDERS - YouTube About the book: A right understanding of happiness and well-being, and the pathways to achieve them is the subject matter of the book. You will discover inside, a unique confluence of positive psychology, yoga, laughter yoga, meditation, and spirituality. It outlines twelve set of proven practices that are known to do wonders. Each chapter begins with a description of the practice, takes you through step-by-step instructions on how to do it, and provides deep insights from experienced practitioners. The practices covered...
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मराठी साहित्य – कवितेचा उत्सव ☆ सेतू – कवी स्व वसंत बापट  ☆  कवितेचे रसग्रहण सौ.अमृता देशपांडे

स्व वसंत बापट जन्म - 25 जुलाई 1922 मृत्यु - 17 सितम्बर 2002 ☆ कवितेचा उत्सव ☆ सेतू ☆ कवी स्व वसंत बापट  ☆  प्रस्तुति - सौ. अमृता देशपांडे ☆  शरदामधली पहाट आली तरणीताठी हिरवे हिरवे चुडे चमकती दोन्ही हाती शिरि मोत्याचे कणिस तरारुन झुलते आहे खांद्यावरती शुभ्र कबूतर खुलते आहे   नुक्ते झाले स्नान हिचे ते राजविलासी आठ बिचा-या न्हाऊ घालित होत्या दासी निरखित अपुली आपण कांती आरसपानी थबकुन उठली चाहुल भलती येता कानी   उठली तो तिज जाणवले की विवस्त्र आपण घे सोनेरी वस्त्र ओढुनी कर उंचावुन हात दुमडुनि सावरता ते वक्षापाशी उभी राहिली क्षण ओठंगुन नीलाकाशी   लाल ओलसर पाउल उचलुन तशी निघाली वारा नखर करीत भवती रुंजी घाली निळ्या तलावाघरचे दालन उघडे आहे अनिश्चयाने ती क्षितिजाशी उभीच आहे   माथ्यावरती निळी ओढणी तलम मुलायम गालावरती फुलचुखिने व्रण केला कायम पायाखाली येइल ते ते खुलत आहे आभाळाची कळी उगिच उमलत आहे   झेंडू डेरेदार गळ्याशी बिलगुन बसले शेवंतीचे स्वप्न सुनहरी आजच हसले निर्गंधाचे रंग पाहुनी गहिरे असले गुलाब रुसले, ईर्षेने फिरुनि मुसमुसले   फुलांफुलांची हनु कुरवाळित अल्लड चाले तृणातृणाशी ममतेने ही अस्फुट बोले वात्सल्य न हे! हे ही यौवन विभ्रम सारे सराईताला कसे कळावे मुग्ध इशारे   दिसली ती अन् विस्फारित मम झाले नेत्र स्पर्शाने या पुलकित झाले गात्र नि गात्र ही शरदातिल पहाट..... की......ती तेव्हाची  तू? तुझिया माझ्या मध्ये पहाटच झाली सेतु   कवी -...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सामाजिक चेतना #71 ☆ पर्यावरण प्रहरी ☆ सुश्री निशा नंदिनी भारतीय

सुश्री निशा नंदिनी भारतीय  (सुदूर उत्तर -पूर्व  भारत की प्रख्यात  लेखिका/कवियित्री सुश्री निशा नंदिनी जी  के साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना की अगली कड़ी में  प्रस्तुत है  एक भावप्रवण कविता पर्यावरण प्रहरी ।आप प्रत्येक सोमवार सुश्री  निशा नंदिनी  जी के साहित्य से रूबरू हो सकते हैं।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सामाजिक चेतना  #71 ☆ ☆ पर्यावरण प्रहरी ☆   करें काम कुछ ऐसा धरती स्वर्ग दिखाई दे इतनी खुशियां फैला दें हर दिन पर्व दिखाई दे।   जो काटे हरे वृक्षों को उनको आड़े हाथ धरें ज्ञान मान देकर उनको जीवन पथ साफ करें।   अपने पर हो गर्व हमको करें प्रकृति की रक्षा प्रकृति हमारा धन असली पोटली बांध करें सुरक्षा।   सब हों मानवता रक्षक शिक्षा का करें प्रसार करे जो दूषित गंगा को उन पर करें वाणी प्रहार।   सब हों पर्यावरण प्रहरी करें प्रदूषण पर प्रहार जो करे दूषित भू मंडल उन पर पड़े कर की मार।   © निशा नंदिनी भारतीय  तिनसुकिया, असम 9435533394 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈ ...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ परिहार जी का साहित्यिक संसार # 70 ☆ व्यंग्य – साहित्यिक किसिम के दोस्त ☆ डॉ कुंदन सिंह परिहार

डॉ कुंदन सिंह परिहार (वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं।   हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं।  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे  आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं।  उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं। आज  प्रस्तुत है एक  अतिसुन्दर व्यंग्य रचना  ‘साहित्यिक किसिम के दोस्त’।  इस सार्थक व्यंग्य  के लिए डॉ परिहार जी की  लेखनी को  सादर नमन।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार  # 70 ☆ ☆ व्यंग्य – साहित्यिक किसिम के दोस्त ☆ सबेरे सात बजे फोन घर्राता है। आधी नींद में उठाता हूँ। 'हेलो।’ 'हेलो नमस्कार। पहचाना?' 'नहीं पहचाना।’ 'हाँ भई, आप भला क्यों पहचानोगे! एक...
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हिन्दी साहित्य – कविता ☆ गांधीजी के जन्मोत्सव पर विशेष – गांधी-150 (गांधी वादी मित्रों का आत्म चिंतन) ☆ श्री राकेश कुमार पालीवाल

श्री राकेश कुमार पालीवाल (सुप्रसिद्ध गांधीवादी चिंतक श्री राकेश कुमार पालीवाल जी  वर्तमान में  प्रधान मुख्या आयकर आयुक्त ( प्रिंसिपल  चीफ कमिश्नर) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पद पर पदासीन हैं। गांधीवादी चिंतन के अतिरिक्त कई सुदूरवर्ती आदिवासी ग्रामों को आदर्श गांधीग्राम बनाने में आपका महत्वपूर्ण योगदान है। आपने कई पुस्तकें लिखी हैं जिनमें  ‘कस्तूरबा और गाँधी की चार्जशीट’ तथा ‘गांधी : जीवन और विचार’ प्रमुख हैं। हम आदरणीय श्री राकेश कुमार पालीवाल जी की  फेसबुक वाल से  गांधीजी के जन्मोत्सव पर एक सार्थक  एवं विचारणीय कविता प्रस्तुत कर रहे हैं – गांधी - 150 (गांधी वादी मित्रों का आत्म चिंतन)) ☆ गांधीजी के जन्मोत्सव पर विशेष ☆  ☆ गांधी - 150 (गांधी वादी मित्रों का आत्म चिंतन)  ☆   बीत गया गांधी - एक सौ पचास भी अब दो अक्तूबर दो हजार बीस में दी जा रही है उसे अंतिम श्रद्धांजलि   इसकी शुरुआत में गांधी वादी संस्थाओं ने की थी बड़ी बड़ी घोषणाएं मसलन एक सौ पचास गांवों को बनाएंगे आदर्श गांधी गांव गांधी के सपनों के और, और भी न जाने बनाई थी कितनी भारी भरकम महत्वाकांक्षी...
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मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ शेखर साहित्य # 8 – कवितेशी बोलू काही ☆ श्री शेखर किसनराव पालखे

श्री शेखर किसनराव पालखे ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – शेखर साहित्य # 8 ☆ ☆ कवितेशी बोलू काही ☆ अनामिक हे सुंदर नाते तुझ्यासवे ग जुळून यावे तुझ्याच साठी माझे असणे तुलाच हे ग कळून यावे आनंदाने हे माझे मन सोबत तुझ्या ग खुलून यावे दुःखाचे की काटेरी हे क्षण कुशीत तुझ्या ग फुलून यावे भेटावी मज तुझी अशी ही घट्ट मिठी ती हवीहवीशी अथांगशा या तुज डोहाची अचूक खोली नकोनकोशी रुजावेस तू मनात माझ्या प्रेमळ नाजूक सुजाणतेने तूच माझे जीवन व्हावे अन तुच असावे जीवनगाणे   © शेखर किसनराव पालखे  पुणे 05/06/20 ≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈...
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