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मराठी साहित्य – जीवन-यात्रा ☆ आत्मसाक्षात्कार – डॉ. श्रीमती तारा भावाळकर – भाग २ ☆ प्रस्तुति – श्रीमती उज्ज्वला केळकर

डॉ. ताराबाई भावाळकर  ☆ आत्मसाक्षात्कार – डॉ. ताराबाई भावाळकर – भाग २ ☆ प्रस्तुति – श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆  श्रीमती उज्ज्वला केळकर तारा –म्हणजे काय ताराबाई, जरा उलगडून सांगा ना! ताराबाई- रूढार्थाने शिक्षित माणसं म्हणजे लिहिता-वाचता येणारी माणसं, असं म्हंटलं जातं. थोडक्यात काय, तर साक्षरता म्हणजे शिक्षण असा अनेकांच्या गैरसमज असतो आणि शिक्षणाने शहाणपण येतं, असंही बर्‍याच जणांना वाटतं. अनक्षरांना ही माणसं आडाणी समजतात. ताराबाई त्यांना आडाणी म्हणत नाहीत. त्या त्यांना अनक्षर म्हणतात. त्यांना अक्षर ओळख नसली, तरी शहाणपण असतं. म्हणूनच त्यांना आडाणी म्हणणं ताराबाईंना कधीच मंजूर नव्हतं. त्यांनी लहानपणापासून ज्या अनक्षर बायका पाहिल्या, ग्रामीण भागातल्या पाहिल्या, आस-पासच्या पाहिल्या, कुटुंबातल्या पाहिल्या, त्या सगळ्यांकडे, तुम्ही ज्याला आत्मभान म्हणता ते होतेच. आत्मजाणीव होती, आहे आणि असणार आहे. ज्याला तुम्ही आज-काल अस्मिता म्हणता तीही लोकपरंपरेमध्ये आहे आणि त्याचे पुरावे म्हणून लोकपरंपरेतील कथा, गीते, उखाणे-आहाणे, ओव्या, अगदी शिव्यासुद्धा.... याच्यामध्ये दिसतात. अन्यायाची जाणीव आणि प्रतिकार करण्याची इच्छा, विद्रोह, हे सगळे, जे स्त्रीवादामध्ये अपेक्षित आहे, ते लोकसाहित्यात ताराबाईंना सुरुवातीपासूनच जाणवत आले आहे. कारण व्यवस्थेबद्दल प्रश्न निर्माण होणं, हे बुद्धिमत्तेचं लक्षण...
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मराठी साहित्य – जीवन-यात्रा ☆ आत्मसाक्षात्कार – डॉ. श्रीमती तारा भावाळकर – भाग १ ☆ प्रस्तुति – श्रीमती उज्ज्वला केळकर

डॉ. श्रीमती तारा भावाळकर संक्षिप्त परिचय जन्म – 1 एप्रिल 1939 एम.ए. पी एच.डी. पुणे विद्यापीठ, हिन्दी पंडीत, अनुवाद पंडीत शालांत शिक्षणानंतर सर्व शिक्षण बहिस्थ पद्धतीने. नोकरी करत. विशेष अभिरुची – नाटक, लोकसंस्कृती, लोकसाहित्य, लेखन, भाषण, दिग्दर्शन, अभिनय , समीक्षा, संशोधन, अनेक चर्चासत्रातून सहभाग, अनेक भाषणे, राष्ट्रीय व आंतर्राष्ट्रीय स्तरावर शोधांनिबंध सादर. लोकसाहित्याची स्त्रीवादी समीक्षा हे नवे संशोधन लेख, समीक्षा, संशोधन, कथा, व्यक्तिचित्रे इ. विविध विषयांवर 36 च्या वर पुस्तके प्रकाशित पुरस्कार - काकासाहेब खाडिलकर जीवन गौरव पुरस्कारासह 32 च्या वर पुरस्कार अध्यापन हा व्यवसाय.  सध्यानिवृत्त संपर्क – 3, ‘स्नेहदीप,’ डॉ.  आंबेडकर रास्ता , सांगली 416416 दूरभाष - 0233 2373326 भ्रमणध्वनी - 9881063099 श्रीमती उज्ज्वला केळकर  ☆ आत्मसाक्षात्कार - डॉ. ताराबाई भावाळकर - भाग १ ☆ प्रस्तुति - श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆  आत्मसाक्षात्कार म्हणजे स्वत:शीच केलेलं हितगुज किंवा आपणच घेतलेली आपली मुलाखतच म्हणा ना! डॉ. तारा भावाळकर या लोकसाहित्याच्या आणि लोकसंस्कृतीच्या अभ्यासक समीक्षक आणि संशोधक. या व्यतिरिक्त नाट्य, समाज, शिक्षण इ. अन्य क्षेत्रातही त्यांच्या लेखणीने कलमक्षेप केला आहे. त्यांनी आपला लेखन प्रवास, कार्यकर्तृत्व, आपले विचार, धारणा याबद्दल जो आत्मसंवाद साधला आहे…...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग -15 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी

सुश्री शिल्पा मैंदर्गी (आदरणीया सुश्री शिल्पा मैंदर्गी जी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन में किसी भी उम्र में कोई भी कठिनाई हमें हमारी सफलता के मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। नेत्रहीन होने के पश्चात भी आपमें अद्भुत प्रतिभा है। आपने बी ए (मराठी) एवं एम ए (भरतनाट्यम) की उपाधि प्राप्त की है।) ☆ जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग – 15 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी☆  (सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी) (सुश्री शिल्पा मैंदर्गी के जीवन पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ “माझी वाटचाल…. मी अजून लढते आहे” (“मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”) का ई-अभिव्यक्ति (मराठी) में सतत प्रकाशन हो रहा है। इस अविस्मरणीय एवं प्रेरणास्पद कार्य हेतु आदरणीया सौ. अंजली दिलीप गोखले जी का साधुवाद । वे सुश्री शिल्पा जी की वाणी को मराठी में लिपिबद्ध कर रहीं हैं और उसका  हिंदी भावानुवाद “मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”, सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी जी कर रहीं हैं। इस श्रंखला को आप प्रत्येक शनिवार पढ़ सकते हैं । )   मेरी...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग -14 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी

सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  (आदरणीया सुश्री शिल्पा मैंदर्गी जी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन में किसी भी उम्र में कोई भी कठिनाई हमें हमारी सफलता के मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। नेत्रहीन होने के पश्चात भी आपमें अद्भुत प्रतिभा है। आपने बी ए (मराठी) एवं एम ए (भरतनाट्यम) की उपाधि प्राप्त की है।) ☆ जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग – 14 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी☆  (सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी) (सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  के जीवन पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ “माझी वाटचाल…. मी अजून लढते आहे” (“मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”) का ई-अभिव्यक्ति (मराठी) में सतत प्रकाशन हो रहा है। इस अविस्मरणीय एवं प्रेरणास्पद कार्य हेतु आदरणीया सौ. अंजली दिलीप गोखले जी का साधुवाद । वे सुश्री शिल्पा जी की वाणी को मराठी में लिपिबद्ध कर रहीं हैं और उसका  हिंदी भावानुवाद “मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”, सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी जी कर रहीं हैं। इस श्रंखला को आप प्रत्येक शनिवार पढ़ सकते हैं । )   इतने साल के...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग -13 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी

सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  (आदरणीया सुश्री शिल्पा मैंदर्गी जी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन में किसी भी उम्र में कोई भी कठिनाई हमें हमारी सफलता के मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। नेत्रहीन होने के पश्चात भी आपमें अद्भुत प्रतिभा है। आपने बी ए (मराठी) एवं एम ए (भरतनाट्यम) की उपाधि प्राप्त की है।) ☆ जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग – 13 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी☆  (सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी) (सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  के जीवन पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ “माझी वाटचाल…. मी अजून लढते आहे” (“मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”) का ई-अभिव्यक्ति (मराठी) में सतत प्रकाशन हो रहा है। इस अविस्मरणीय एवं प्रेरणास्पद कार्य हेतु आदरणीया सौ. अंजली दिलीप गोखले जी का साधुवाद । वे सुश्री शिल्पा जी की वाणी को मराठी में लिपिबद्ध कर रहीं हैं और उसका  हिंदी भावानुवाद “मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”, सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी जी कर रहीं हैं। इस श्रंखला को आप प्रत्येक शनिवार पढ़ सकते हैं । )   प्रात्यक्षिक इम्तिहान की...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ ‘हत्थ खिच्च के रखीं पुतर’…. स्व. शांतिरानी पॉल ☆ श्री अजीत सिंह, पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन

श्री अजीत सिंह (हमारे आग्रह पर श्री अजीत सिंह जी (पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन) हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए विचारणीय आलेख, वार्ताएं, संस्मरण साझा करते रहते हैं।  इसके लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं। आज  श्री अजीत सिंह जी द्वारा प्रस्तुत है ई-अभिव्यक्ति के जीवन-यात्रा स्तम्भ के अंतर्गत श्रद्धांजलि स्वरुप एक प्रेरक प्रसंग -  ‘'हत्थ खिच्च के रखीं पुतर'.... स्व. शांतिरानी पॉल’। हम आपकी अनुभवी कलम से ऐसे ही आलेख समय-समय पर साझा करते रहेंगे।) श्रद्धांजलि ☆ जीवन यात्रा ☆ 'हत्थ खिच्च के रखीं पुतर'.... स्व. शांतिरानी पॉल ☆ वे चली गईं यह कहकर.... "हत्थ खिच्च के रखीं पुतर"! शांतिरानी पॉल का आशीर्वचन  हमेशा एक ही होता था, "हत्थ खिच्च के रखीं पुतर" यानि खर्चा संभल के करना। जीवन में भारी उतार चढ़ाव देख चुकी वे अक्सर कहती थीं, "मुसीबतों को ज़्यादा याद नहीं करना चाहिए, नेमतों को याद रखो, और सबसे बड़ी बात यह कि किफायत से जीवन जीओ। बुरे वक़्त में सबसे पहले रुपया पैसा ही काम आता है। वक़्त कभी भी बदल सकता है"। अपने...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग -12 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी

सुश्री शिल्पा मैंदर्गी   (आदरणीया सुश्री शिल्पा मैंदर्गी जी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन में किसी भी उम्र में कोई भी कठिनाई हमें हमारी सफलता के मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। नेत्रहीन होने के पश्चात भी आपमें अद्भुत प्रतिभा है। आपने बी ए (मराठी) एवं एम ए (भरतनाट्यम) की उपाधि प्राप्त की है।) ☆ जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग – 12 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी☆  (सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी) (सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  के जीवन पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ “माझी वाटचाल…. मी अजून लढते आहे” (“मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”) का ई-अभिव्यक्ति (मराठी) में सतत प्रकाशन हो रहा है। इस अविस्मरणीय एवं प्रेरणास्पद कार्य हेतु आदरणीया सौ. अंजली दिलीप गोखले जी का साधुवाद । वे सुश्री शिल्पा जी की वाणी को मराठी में लिपिबद्ध कर रहीं हैं और उसका  हिंदी भावानुवाद “मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”, सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी जी कर रहीं हैं। इस श्रंखला को आप प्रत्येक शनिवार पढ़ सकते हैं । )   मेरी एम.ए. की...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग -11 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी

सुश्री शिल्पा मैंदर्गी (आदरणीया सुश्री शिल्पा मैंदर्गी जी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन में किसी भी उम्र में कोई भी कठिनाई हमें हमारी सफलता के मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। नेत्रहीन होने के पश्चात भी आपमें अद्भुत प्रतिभा है। आपने बी ए (मराठी) एवं एम ए (भरतनाट्यम) की उपाधि प्राप्त की है।) ☆ जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग – 11 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी☆  (सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी) (सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  के जीवन पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ “माझी वाटचाल…. मी अजून लढते आहे” (“मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”) का ई-अभिव्यक्ति (मराठी) में सतत प्रकाशन हो रहा है। इस अविस्मरणीय एवं प्रेरणास्पद कार्य हेतु आदरणीया सौ. अंजली दिलीप गोखले जी का साधुवाद । वे सुश्री शिल्पा जी की वाणी को मराठी में लिपिबद्ध कर रहीं हैं और उसका  हिंदी भावानुवाद “मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”, सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी जी कर रहीं हैं। इस श्रंखला को आप प्रत्येक शनिवार पढ़ सकते हैं । )   मेरा भरतनाट्यम नृत्य...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग -10 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी

सुश्री शिल्पा मैंदर्गी (आदरणीया सुश्री शिल्पा मैंदर्गी जी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन में किसी भी उम्र में कोई भी कठिनाई हमें हमारी सफलता के मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। नेत्रहीन होने के पश्चात भी आपमें अद्भुत प्रतिभा है। आपने बी ए (मराठी) एवं एम ए (भरतनाट्यम) की उपाधि प्राप्त की है।) ☆ जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग – 10 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी☆  (सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी) (सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  के जीवन पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ “माझी वाटचाल…. मी अजून लढते आहे” (“मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”) का ई-अभिव्यक्ति (मराठी) में सतत प्रकाशन हो रहा है। इस अविस्मरणीय एवं प्रेरणास्पद कार्य हेतु आदरणीया सौ. अंजली दिलीप गोखले जी का साधुवाद । वे सुश्री शिल्पा जी की वाणी को मराठी में लिपिबद्ध कर रहीं हैं और उसका  हिंदी भावानुवाद “मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”, सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी जी कर रहीं हैं। इस श्रंखला को आप प्रत्येक शनिवार पढ़ सकते हैं । )   अंदमान के उस...
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हिन्दी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग -9 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी

सुश्री शिल्पा मैंदर्गी (आदरणीया सुश्री शिल्पा मैंदर्गी जी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं। आपने यह सिद्ध कर दिया है कि जीवन में किसी भी उम्र में कोई भी कठिनाई हमें हमारी सफलता के मार्ग से विचलित नहीं कर सकती। नेत्रहीन होने के पश्चात भी आपमें अद्भुत प्रतिभा है। आपने बी ए (मराठी) एवं एम ए (भरतनाट्यम) की उपाधि प्राप्त की है।) ☆ जीवन यात्रा ☆ मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ – भाग - 9 – सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  ☆ प्रस्तुति – सौ. विद्या श्रीनिवास बेल्लारी☆  (सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी) (सुश्री शिल्पा मैंदर्गी  के जीवन पर आधारित साप्ताहिक स्तम्भ “माझी वाटचाल…. मी अजून लढते आहे” (“मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”) का ई-अभिव्यक्ति (मराठी) में सतत प्रकाशन हो रहा है। इस अविस्मरणीय एवं प्रेरणास्पद कार्य हेतु आदरणीया सौ. अंजली दिलीप गोखले जी का साधुवाद । वे सुश्री शिल्पा जी की वाणी को मराठी में लिपिबद्ध कर रहीं हैं और उसका  हिंदी भावानुवाद “मेरी यात्रा…. मैं अब भी लड़ रही हूँ”, सौ विद्या श्रीनिवास बेल्लारी जी कर रहीं हैं। इस श्रंखला को आप प्रत्येक शनिवार पढ़ सकते हैं । )   अंडमान जाने को...
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