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हिंदी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ जन्म दिवस विशेष – 27 अगस्त – डॉ अखिलेश गुमाश्ता (धार्मिक-आध्यात्मिक चिंतक, लेखक चिकित्सक) ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

डॉ अखिलेश गुमाश्ता ☆ जन्म दिवस विशेष – 27 अगस्त – डॉ अखिलेश गुमाश्ता (धार्मिक-आध्यात्मिक चिंतक, लेखक चिकित्सक) ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव  (श्री प्रतुल श्रीवास्तव जी ने विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों के जन्मदिवस पर विशेष आलेख रचित करने का स्तुत्य कार्य प्रारम्भ किया हैं, इस विशेष कार्य के लिए उन्हें साधुवाद। आज प्रस्तुत है डॉ अखिलेश गुमाश्ता जी के जन्मदिवस के उपलक्ष में विशेष आलेख। ) डॉ अखिलेश गुमाश्ता (धार्मिक-आध्यात्मिक चिंतक, लेखक चिकित्सक) नगर की धार्मिक-आध्यात्मिक बैठकों, सभाओं और महोत्सवों में अथवा धार्मिक-आध्यात्मिक क्षेत्र की विभूतियों के सत्संग में यदि आपको कोई सामान्य कद-काठी, गौर वर्ण, बेचैन तबियत, गहरी आंखों तथा तेज और आत्मविश्वास से दमकते चेहरे से परिपूर्ण व्यक्ति नजर आए तो आप बिना किसी दुविधा के समझ लें कि आप हिन्दू धर्म पर असीम आस्था रखने वाले सुप्रसिद्ध अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अखिलेश गुमाश्ता से रूबरू हैं। डॉ. गुमाश्ता समर्पित, सुयोग्य आदर्श नागरिक और भारतीय धार्मिक व सांस्कृतिक सत्ता को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्व पटल पर रखने वाले गंभीर चिकित्सक...
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हिंदी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ जन्म दिवस विशेष – 18 अगस्त – “शब्दर्षि” आचार्य भगवत दुबे ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

आचार्य भगवत दुबे ☆ जन्म दिवस विशेष – 18 अगस्त - "शब्दर्षि" आचार्य भगवत दुबे ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆आचार्य भगवत दुबे ☆ डॉ राजकुमार 'सुमित्र'   आचार्य भगवत दुबे को जन्मदिन की बधाई 🌹💐 भारत के हिन्दी साहित्यकारों में संभवतः 'दधीचि' महाकाव्य के रचयिता, महाकवि आचार्य भगवत दुबे ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो कम्प्यूटर की गति से सार्थक लेखन कर रहे हैं। पचास कृतियों के सृजनकर्ता आशुकवि आचार्य भगवत दुबे को उनके जन्मदिवस १८ अगस्त को हार्दिक बधाई। शुभ सुन्दर हो जन्मदिन बढ़े आयु यश मान वरद पुत्र हो वाणी के वाणी के वरदान  - डॉ राजकुमार 'सुमित्र' श्री प्रतुल श्रीवास्तव  (श्री प्रतुल श्रीवास्तव जी ने विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों के जन्मदिवस पर विशेष आलेख रचित करने का स्तुत्य कार्य प्रारम्भ किया हैं, इस विशेष कार्य के लिए उन्हें साधुवाद। आज प्रस्तुत है आचार्य भगवत दुबे जी के जन्मदिवस के उपलक्ष में विशेष आलेख "शब्दर्षि" आचार्य भगवत दुबे। ) अलौकिक शांति, प्रसन्नता व ज्ञान की आभा से आलोकित, उन्नत ललाट मुखमंडल, कंधों तक लहराते कपासी केश आचार्य भगवत...
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हिंदी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ जन्म दिवस विशेष – चर्चित व्यंग्यकार विवेक रंजन ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

श्री प्रतुल श्रीवास्तव  ☆ 28 जुलाई जन्म दिवस पर विशेष – चर्चित व्यंग्यकार विवेक रंजन ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆ ऊर्जा से भरपूर सक्रिय कवि, नाटक लेखक, एवम् स्थापित व्यंग्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव बात के धनी, मिलनसार किन्तु स्पष्ट वक्ता हैं । मंडला में जन्में विवेक रंजन देश के सुप्रसिद्ध वयोवृद्ध कवि, साहित्यकार प्रो. चित्रभूषण श्रीवास्तव के यशस्वी सुपुत्र हैं । आपने इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा के उपरांत मध्यप्रदेश विद्युत मंडल में सेवा प्रारंभ की और गत वर्ष मुख्य अभियंता के रूप में सेवानिवृत्त हुए । इन्होंने लंबा समय जबलपुर में बिताया है । अपने सेवाकाल में आपने परमाणु बिजलीघर चुटका- मंडला का सर्वेक्षण, अनेक लघु पनबिजली योजनाओं के कार्य सहित विद्युत संबंधी अनेक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर परिणाम दायी कार्य किये । विशेष बात यह है कि आपने विरासत में प्राप्त अध्ययन, चिंतन-मनन और साहित्यिक अभिरुचि को बनाये रखा । "कुछ लिख के सो, कुछ पढ़ के सो, तुम जिस जगह जागे सबेरे, उस जगह से बढ़के सो" के मार्ग...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक साहित्य # 162 ☆ जीवन-यात्रा – जन-जागरण अभियान, अविष्कार व तकनीकी लेखन – इं. हेमन्त कुमार ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक साहित्य ”  में हम श्री विवेक जी की चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल  (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी , जबलपुर ) से सेवानिवृत्त हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। आपको वैचारिक व सामाजिक लेखन हेतु अनेक पुरस्कारो से सम्मानित किया जा चुका है। ) आज प्रस्तुत है बिजनौर, उत्तर प्रदेश के अभियंता इं हेमन्त कुमार के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित प्रेरकआलेख  "जन-जागरण अभियान, अविष्कार व तकनीकी लेखन - इं. हेमन्त कुमार "।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # 162 ☆ जीवन-यात्रा - जन-जागरण अभियान, अविष्कार व तकनीकी लेखन - इं. हेमन्त कुमार  सिंचाई के लिए "कंट्रोल्ड वाटर एंड एयर डिस्पेंसर फॉर इनडोर एंड आउटडोर प्लांट्स"  आविष्कार का पेटेंट मिला  इं. हेमन्त कुमार को नवाचार, शोध, विज्ञान लेखन, हरियाली विस्तार, भवन कला, रेखा चित्रण, तथा स्थानीय इतिहास संवर्धन के क्षेत्र...
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हिंदी साहित्य – यात्रा-वृत्तांत ☆ काशी चली किंगस्टन! – भाग – 20 ☆ डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी ☆

डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी (डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी जी एक संवेदनशील एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार के अतिरिक्त वरिष्ठ चिकित्सक  के रूप में समाज को अपनी सेवाओं दे रहे हैं। अब तक आपकी चार पुस्तकें (दो  हिंदी  तथा एक अंग्रेजी और एक बांग्ला भाषा में ) प्रकाशित हो चुकी हैं।  आपकी रचनाओं का अंग्रेजी, उड़िया, मराठी और गुजराती  भाषाओं में अनुवाद हो  चुकाहै। आप ‘कथाबिंब ‘ द्वारा ‘कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार (2013, 2017 और 2019) से पुरस्कृत हैं एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा द्वारा “हिंदी सेवी सम्मान “ से सम्मानित हैं।  ☆ यात्रा-वृत्तांत ☆ धारावाहिक उपन्यास - काशी चली किंगस्टन! – भाग – 20 ☆ डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी☆ (हमें  प्रसन्नता है कि हम आदरणीय डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी जी के अत्यंत रोचक यात्रा-वृत्तांत - "काशी चली किंगस्टन !" को धारावाहिक उपन्यास के रूप में अपने प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का प्रयास कर रहे हैं। कृपया आत्मसात कीजिये।) घूमने को जगह और भी हैं कनाडा में, किंग्सटन के सिवा जैसे जैसे रुपाई को मौका मिलता वह हमें लेकर आस...
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हिंदी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ जन्म दिवस विशेष –  शिक्षाविद डॉ. अभिजात कृष्ण ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

श्री प्रतुल श्रीवास्तव  ☆ समन्वय-सामंजस्य के जादूगर - शिक्षाविद डॉ. अभिजात कृष्ण ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆ 26 मार्च को जन्म दिवस पर विशेष – अपने विद्यार्थियों, मित्रों, परिचितों सहित अपरिचितों की सहायता को भी सदा तत्पर रहने वाले सहज-सरल प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी श्री जानकीरमण महाविद्यालय के ऊर्जावान प्राचार्य डॉ. अभिजात कृष्ण त्रिपाठी की व्यस्त दिनचर्या हैरान करने वाली है । उनके महाविद्यालय सम्बन्धी दायित्वों के निर्वहन, लोगों की मदद, साहित्यिक-सांस्कृतिक-सामाजिक कार्यक्रमों में योगदान और नियमित अध्ययन, चिंतन-मनन के साथ-साथ विद्वतजनों से उनकी चर्चाओं के दौर को देखकर लगता है कि आखिर ये महानुभाव भोजन और विश्राम आदि कब करते होंगे ? आश्चर्य यह कि जब भी अभिजात से मिलो वो हमेशा तनाव मुक्त और ताजगी से भरे दिखाई देते हैं । आज के दौर में कर्म और सामाजिक दायित्वों के प्रति ऐसे समर्पित-निष्ठावान अनुज पर गर्व होता है । शिक्षाविद, साहित्यकार, पत्रकार स्व.पंडित हरिकृष्ण त्रिपाठी जी के यशस्वी पुत्र अभिजात कृष्ण हिन्दी में स्नातकोत्तर, पुस्तकालय विज्ञान एवं विधि में स्नातक हैं...
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हिंदी साहित्य – यात्रा-वृत्तांत ☆ काशी चली किंगस्टन! – भाग – 9 ☆ डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी ☆

डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी (डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी जी एक संवेदनशील एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार के अतिरिक्त वरिष्ठ चिकित्सक  के रूप में समाज को अपनी सेवाओं दे रहे हैं। अब तक आपकी चार पुस्तकें (दो  हिंदी  तथा एक अंग्रेजी और एक बांग्ला भाषा में ) प्रकाशित हो चुकी हैं।  आपकी रचनाओं का अंग्रेजी, उड़िया, मराठी और गुजराती  भाषाओं में अनुवाद हो  चुकाहै। आप ‘कथाबिंब ‘ द्वारा ‘कमलेश्वर स्मृति कथा पुरस्कार (2013, 2017 और 2019) से पुरस्कृत हैं एवं महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा द्वारा “हिंदी सेवी सम्मान “ से सम्मानित हैं।  ☆ यात्रा-वृत्तांत ☆ धारावाहिक उपन्यास - काशी चली किंगस्टन! – भाग – 9 ☆ डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी☆ (हमें  प्रसन्नता है कि हम आदरणीय डॉ अमिताभ शंकर राय चौधरी जी के अत्यंत रोचक यात्रा-वृत्तांत - "काशी चली किंगस्टन !" को धारावाहिक उपन्यास के रूप में अपने प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का प्रयास कर रहे हैं। कृपया आत्मसात कीजिये।) प्रपात के पीछे यानी सबसे पहले आज बिहाइंड द फॉल देखने जायेंगे। मालूम हुआ हम तीनों को वहाँ नायाग्रा के किनारे...
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हिंदी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ जन्म दिवस विशेष – शिक्षाविद, साहित्यकार ‘विदग्ध’ ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆

श्री प्रतुल श्रीवास्तव  ☆23 मार्च को जन्म दिवस पर विशेष - शिक्षाविद, साहित्यकार 'विदग्ध' ☆ श्री प्रतुल श्रीवास्तव ☆ (ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से गुरुवर प्रो.चित्रभूषण श्रीवास्तव "विदग्ध" जी को उनके यशस्वी 95 वें जन्म दिवस पर सादर प्रणाम एवं हार्दिक शुभकामनाएं।) संघर्ष-साधना से भरे सात्विक जीवन के साथ अध्ययन, चिंतन-मनन से प्राप्त परिपक्वता और आभा के तेज से जिनका मुखमंडल सदा दीप्त रहता है उन्हें हम सब कवि-साहित्यकार, अनुवादक, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद प्रो.चित्रभूषण श्रीवास्तव "विदग्ध" के नाम से जानते हैं । हिंदी, अर्थशास्त्र एवं शिक्षा में स्नातकोत्तर उपाधियां प्राप्त कर आपने साहित्य रत्न की उपाधि भी प्राप्त की । विभिन्न नगरों के विद्यालयों में अपनी विद्वता एवं अध्यापन कौशल से अपने सहयोगियों और छात्रों में विशिष्ट आदर व स्नेह के पात्र रहे प्रो. चित्रभूषण जी केन्द्रीय विद्यालय क्रमांक 1, जबलपुर के संस्थापक प्राचार्य रहे हैं । वे प्रान्तीय शिक्षण महाविद्यालय जबलपुर से प्राध्यापक के रूप में सेवानिवृत्त हुए। 1948 में देश की प्रतिष्ठित पत्रिका सरस्वती में विदग्ध जी की प्रथम रचना प्रकाशित हुई...
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हिन्दी साहित्य – संस्मरण ☆ रमेश बतरा : होलिया में भर आती हैं आंखें ☆  श्री कमलेश भारतीय ☆ 

श्री कमलेश भारतीय  (जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी, बी एड, प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । ‘यादों की धरोहर’ हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह – ‘एक संवाददाता की डायरी’ को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह- महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता) ☆ संस्मरण - रमेश बतरा : होलिया में भर आती हैं आंखें ☆  श्री कमलेश भारतीय ☆ (15 मार्च - प्रिय रमेश बतरा की पुण्यतिथि । बहुत याद आते हो मेशी। तुम्हारी माँ  कहती थीं कि यह मेशी और केशी की जोड़ी है । बिछुड़ गये ….लघुकथा में योगदान और संगठन की शक्ति तुम्हारे नाम । चंडीगढ़ की कितनी शामें तुम्हारे नाम…. - कमलेश भारतीय )  एक संस्मरण ( कृपया क्लिक करें) 👉  हिन्दी साहित्य –...
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मराठी साहित्य – जीवन यात्रा ☆ आत्मसंवाद… श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆ श्री सुहास रघुनाथ पंडित ☆

श्री सुहास रघुनाथ पंडित ☆ आत्मसंवाद… श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆ श्री सुहास रघुनाथ पंडित ☆ आत्मसंवाद या लेखमालेतील शेवटचा लेख सौ.उज्वला केळकर यांचा असून ते सहा भाग आज पुन्हा एकदा वाचले. ही लेखमाला सुरू करण्याची मूळ कल्पना त्यांचीच. ती चालू करण्यासाठी व चालू ठेवण्यासाठी त्यांनी केलेले प्रयत्न व धडपड याची आम्हाला कल्पनाआहे.या निमित्ताने दीर्घकाळ गांभीर्याने लेखन करणा-या साहित्यिकांची जडणघडण, लेखनातील विविधता, आलेले अनुभव हे सर्व वाचायला मिळाले व सर्वांत महत्त्वाचे म्हणजे अंतर्मुख होऊन विचार करण्याची संधी मिळाली. आज सौ.केळकर यांचा आत्मसंवाद वाचल्यावर मात्र एक वेगळाच अनुभव आला. आपल्या सहवासातील व्यक्ती कशी आहे हे आपल्याला समजले आहे असे आपल्याला वाटते. पण प्रत्यक्षात आपण त्या व्यक्तीला खूपच कमी ओळखत असतो. सांगलीतीलच असल्यामुळे त्यांना भेटण्याचा योग अनेक वेळेला येतो. 'ई-अभिव्यक्ती' च्या निमित्ताने अनेक वेळा चर्चाही होते. पण त्यांच्या स्वतःच्या साहित्य प्रवासाविषयी एवढी माहिती कधीच मिळाली नव्हती. ती आज मिळाली. खरेच, त्यांचा साहित्यप्रवास थक्क करणारा आहे. कथा, कविता, नाट्य, बालसाहित्य, अनुवाद, श्रुतीका, नभोनाट्य अशा विविध प्रांतात सहजतेने प्राविण्य मिळवून इतरांनाही मार्गदर्शन, सहकार्य करण्याची त्यांची वृत्ती कौतुकास्पद आहे. आजही त्यांचा उत्साह...
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