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हिन्दी साहित्य – साहित्य निकुंज # 22 ☆ साक्षात्कार ☆ डॉ राम दरश मिश्र जी से डॉ.भावना शुक्ल की बातचीत ☆ – डॉ. भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची ‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत है ☆ डॉ राम दरश मिश्र जी से डॉ.भावना शुक्ल की बातचीत☆. हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ रामदरश मिश्र जी का जन्म 15 अगस्त 1924 को हुआ। वे एक समर्थ कवि, उपन्यासकार और कहानीकार हैं। किसी भी वाद के कृत्रिम दबाव में न आकर उन्होंने अपना लेखन सहज ही परिवर्तित होने दिया। हम अनुग्रहित हैं डॉ भावना शुक्ल जी  के जिन्होंने हिंदी साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ राम दरश मिश्र जी के साक्षात्कार को ई-अभिव्यक्ति  के प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का अवसर प्रदान किया.)  ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – # 22  साहित्य निकुंज ☆ ☆ डॉ राम दरश मिश्र जी से डॉ.भावना शुक्ल की बातचीत☆ (एक लेखक की हैसियत से कविता...
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हिन्दी साहित्य ☆ डॉ राजकुमार तिवारी “सुमित्र” जन्मदिवस विशेष – पापा जी यानी मेरे पिताजी: डॉ.सुमित्र ☆ डॉ.भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची ‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत है उनके पिताश्री  एवं मेरे गुरवर डॉ राजकुमार तिवारी "सुमित्र " जी के जन्मदिवस पर उनकी स्मृतियाँ। ) ☆ डॉ राजकुमार तिवारी "सुमित्र" जन्मदिवस विशेष – पापा जी यानी मेरे पिताजी: डॉ.सुमित्र ☆   पिता को पापा कहना कब शुरू किया यह याद नहीं . लगता है यह संबोधन तुतलाहट से निकला होगा. हम भाई-बहनों को कभी-कभार डांट जरुर पड़ी है, मार नहीं. शायद एक आद बार भैया के कान पकड़े गए हों.  गर्व यह कि हमें पापा जी का लाड़ दुलार तो मिलता रहा किंतु, उन की व्यस्तता के कारण हमारी स्कूल की देखभाल का जिम्मा ममतामयी मां ही संभालती रहीं . घर का वातावरण धार्मिक, साहित्यिक सांस्कृतिक था. घर...
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हिन्दी साहित्य – साहित्य निकुंज # 19 ☆ साक्षात्कार ☆ सूर्यबाला जी से डॉ.भावना शुक्ल की बातचीत ☆ – डॉ. भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची ‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत है ☆ सूर्यबाला जी से डॉ.भावना शुक्ल की बातचीत☆. वरिष्ठ रचनाकार, काव्य जगत से अपने लेखन की शुरुआत करने वाली, श्रेष्ठ व्यंग्य लेखिका अनेक सम्मान से सम्मानित आज की श्रेष्ठ कथा लेखिका बहुमुखी प्रतिभा की धनी सूर्यबालाजी से उनके बहुआयामी व्यक्तित्व तथा विविध लेखन विधा के संदर्भ में सूर्यबाला जी ने बहुत ही उम्दा तरीके से प्रस्तुति दी है। प्रस्तुत है सूर्यबाला जी से डॉ भावना शुक्ल जी की बातचीत..... हम अनुग्रहित हैं डॉ भावना शुक्ल जी  के जिन्होंने हिंदी साहित्य की सुविख्यात साहित्यकार सूर्यबाला जी के साक्षात्कार को ई-अभिव्यक्ति  के प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का अवसर प्रदान किया.)  ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – # 19  साहित्य निकुंज ☆ ☆ सूर्यबाला जी...
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हिन्दी साहित्य – साक्षात्कार ☆ चित्रा मुद्गल जी से डॉ. भावना शुक्ल की बातचीत ☆ – डॉ. भावना शुक्ल

डॉ भावना शुक्ल (डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची ‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत है ☆ चित्रा मुद्गल जी से डॉ. भावना शुक्ल की बातचीत ☆. हम अनुग्रहित हैं डॉ भावना शुक्ल जी  के जिन्होंने हिंदी साहित्य की सुविख्यात साहित्यकार चित्र मुद्गल जी के साक्षात्कार को ई-अभिव्यक्ति  के प्रबुद्ध पाठकों के साथ साझा करने का अवसर प्रदान किया. )    ☆ चित्रा मुद्गल जी से डॉ. भावना शुक्ल की बातचीत ☆   (“लेखक लेखन सर्जना सरिता किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, उसका स्रोत तो हिमालय के किसी कोने में अगर गंगा का है यह तो ऐसे ही मनुष्य की चेतना में हर मस्तिष्क की चेतना में कहीं वह बैठी हुई है, कुछ नहीं कह पाते, कुछ कह पाते हैं और लिखकर अभिव्यक्त कर पाते...
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जीवन यात्रा – श्री संजय भारद्वाज, हिंदी आंदोलन परिवार ☆ (30 सितम्बर 2019 -2020 रजत जयंती वर्ष) ☆

 ☆ जीवन यात्रा – श्री संजय भारद्वाज, हिंदी आंदोलन परिवार ☆ (प्रसिद्ध साहित्यिक-सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था हिंदी आंदोलन परिवार 30 सितम्बर 2019 को रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर रही है। ई-अभिव्यक्ति  की ओर से इस सफल यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाएं .  इस अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष  श्री संजय भारद्वाज  जी से  सुश्री वीनु जमुआर जी की बातचीत) वीनु जमुआर- सर्वप्रथम हिंदी आंदोलन परिवार के रजत जयंती वर्ष में कदम रखने के उपलक्ष्य में अशेष बधाइयाँ और अभिनंदन। अब तक की अनवरत यात्रा से  देश भर में चर्चित नाम बन चुका है हिंआप। हिंआप की स्थापना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए। इसकी स्थापना का बीज कब और कैसे बोया गया? संजय भारद्वाज- हिंआप का बीज इसकी स्थापना के लगभग सोलह वर्ष पूर्व 1979 के आसपास ही बोया गया था। हुआ यूँ कि मैं नौवीं कक्षा में पढ़ता था। बाल कटाने के लिए एक दुकान पर अपनी बारी आने की प्रतीक्षा कर रहा था। प्रतीक्षारत ग्राहकों के लिए कुछ पत्रिकाएँ रखी थीं जिनमें...
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जीवन-यात्रा- सुश्री निशा नंदिनी भारतीय

सुश्री निशा नंदिनी भारतीय    (सुदूर उत्तर -पूर्व  भारत की  वरिष्ठ एवं प्रख्यात  लेखिका/कवियित्री सुश्री निशा नंदिनी  भारतीय जी साहित्य ही नहीं  अपितु समाज सेवा में भी लीन हैं. हमें गर्व है कि आप ई-अभिव्यक्ति  की एक सम्माननीय लेखिका हैं.   इस साक्षात्कार  के माध्यम से आपने अपने जीवन  की  महत्वपूर्ण  साहित्यिक उपलब्धियां  एवं साहित्यिक तथा सामाजिक जीवन पर विस्तृत चर्चा की है. आपकी जीवन यात्रा निश्चित ही नवोदितों के लिए प्रेरणास्पद है. सुश्री  निशा नंदिनी  जी  का इस साक्षात्कार के लिए आभार. )   ☆ जीवन यात्रा - सुश्री निशा नंदिनी भारतीय ☆   १. आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं शिक्षण ? जी, मेरा जन्म रामपुर उत्तर प्रदेश में 1962 में हुआ। मेरे पिता रामपुर शुगर मिल में चीफ इंजीनियर थे। विद्या मंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज द्वारा इलाहाबाद बोर्ड से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। इसके बाद रुहेलखंड विश्व विद्यालय बरेली से बी.ए प्रथम श्रेणी में तथा  एम.ए हिन्दी में प्रथम श्रेणी में पास किया। 21 वर्ष की आयु में (बी. एड) के...
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जीवन-यात्रा- ☆ सुश्री मीनाक्षी भालेराव (पृथा फाउंडेशन, पुणे) ☆

सुश्री मीनाक्षी भालेराव  (ई-अभिव्यक्ति हेतु सुश्री मीनक्षी भालेराव जी के साक्षात्कार पर आधारित आलेख)   ☆ जीवन यात्रा – सुश्री मीनाक्षी भालेराव (साहित्यकार, समाज-सेविका एवं मॉडल) ☆   सुश्री मीनाक्षी भालेराव एक प्रसिद्ध कवयित्री तो हैं ही, इसके अतिरिक्त वे साहित्य, कला, संस्कृति के क्षेत्र में सेवाएँ देने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। गुमनामी में दफन होने से अच्छा है जरूरत मंदों के दिलों में जिन्दा रहें। लोगों की कला को नई पहचान देना और उनका सम्मान करना तथा  सब के साथ सादगी से पेश आना, लोगों के दिलों को जीतना उनकी फि़तरत है और सदैव मुस्कराते रहना उनकी आदतl अपनी सादगी एवं सद्कार्यों के कारण वे समाज में सम्माननीय हैं। उनके अनुसार अपने अन्दर के इंसान को जीवित रखना बहुत जरूरी है। उनके ही शब्दों में – हर एक इन्सान में, एक इन्सान और रहता है, जो बचाना चाहता है, अपने इन्सान होने को विगत २८ वर्षों से उन्होने आपने आपको साहित्य, कला और समाज सेवा में स्वयं को समर्पित कर दिया है। हर किसी की परेशानी को...
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जीवन-यात्रा – ☆ ‘पूर्ण विनाशक’ तक की जीवन यात्रा ☆ श्री आशीष कुमार

श्री आशीष कुमार   (युवा साहित्यकार श्री आशीष कुमार ने जीवन में  साहित्यिक यात्रा के साथ एक लंबी उतार चढ़ाव भरी रहस्यमयी  जीवन यात्रा तय की है। उन्होंने भारतीय दर्शन से परे हिंदू दर्शन, विज्ञान और भौतिक क्षेत्रों से परे सफलता की खोज और उस पर गहन शोध किया है।  उनके साहित्य पर उनके जीवन का प्रभाव  स्पष्ट दिखाई पड़ता है।  श्री आशीष कुमार की शीघ्र प्रकाश्य पुस्तक  'पूर्ण विनाशक'  पढ़ने के पूर्व  एक बार उनकी जीवन यात्रा  अवश्य पढ़ें। श्री आशीष जी की जीवन यात्रा किसी रहस्यमय  उपन्यासिका से कम नहीं है। )   मेरा जन्म 18 सितंबर 1980 को एक छोटे पवित्र शहर हरिद्वार के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था । एक परिवार में, जो जानता है कि जीवन का अर्थ है दूसरों की मदद करना और जितना हो सके उतना सरल जीवन जीना । मेरे पिता ने PSU, BHEL में काम किया । मैंने अपनी बुनियादी शिक्षा पब्लिक स्कूलों से की, जिनकी मासिक फीस 10 रुपये के आसपास होती थी...
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जीवन-यात्रा- आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी  से अंतरजाल  पर एक संक्षिप्त वार्ता। आपके जीवन का सर्वाधिक स्मरणीय क्षण : बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा तथा माँ कवयित्री शांतिदेवी वर्मा के पाँव दबाना. आपके जीवन का कठिनतम : अभी आना शेष है. आपकी ताकत :  पत्नी और परमात्मा आपकी कमजोरी : काम क्रोध मद लोभ भय आत्मकथ्य :   पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा 'नियाज़', काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि . संपादन ८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन. आपका कार्य-जीवनशैली का सामंजस्य : सभी कामना छोड़कर, करता चल तू कर्म / यही लोक-परलोक है, यही धर्म का मर्म समाज को आपका सकारात्मक संदेश : खुश रहो, खुश रखो  ...
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जीवन-यात्रा – श्री दीपक तिवारी “दिव्य”

दीपक तिवारी “दिव्य” (जीवन में प्रत्येक मनुष्य को अपनी जीवन यात्रा नियत समय पर नियत पथ पर चल कर पूर्ण करनी होती है।  किसी का जीवन पथ सीधा सादा सरल होता है तो किसी का कठिन संघर्षमय । मैं  श्री  दीपक तिवारी "दिव्य" जी  के  उतार चढ़ाव से भरी  संघर्षमय जीवन -यात्रा आपसे साझा करना चाहूँगा।  मेरा मानना है  कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जीवन-यात्रा  में  दो जीवन जीता है। एक व्यक्तिगत (Personal) और दूसरा व्यावसायिक (Professional)।  हमें उसके जीवन के दोनों पक्षों का सम्मान करना चाहिए।  जिंदगी  किसी  एक मोड पर रुक नहीं जाती, वह सतत चलती रहती है।  हम उनके उज्ज्वल भविष्य की  कामना  करते हैं । प्रस्तुत है श्री दीपक जी की संघर्षमय यात्रा उनकी ही कलम से।)   जन्म: 17/03/1978 जन्म स्थान: ग्राम भौंरा, तहसील-शाहपुर, जिला-बैतूल, मध्य प्रदेश, शिक्षा:  बी.एससी.(पी.सी.एम) आटोनामस साइंस कालेज जबलपुर। प्रारंभिक-महात्मा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भौंरा जिला बैतूल और बीएससी प्रथम वर्ष की शिक्षा जयवंती हाक्सर महाविद्यालय बैतूल। पिता: श्री अलोपी शंकर तिवारी (रिटायर डिप्टी रेंजर मध्य प्रदेश वन विकास निगम) माता: श्रीमति ज्योति...
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