image_print

मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कपिल साहित्य – सु…शांत ☆ श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे  (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते.  आज प्रस्तुत है स्व सुशांत सिंह राजपूत जी की स्मृति में युवा लेखक श्री कपिल जी के ह्रदय के उदगार उनके आलेख  सु...शांत के माधयम से।)   ☆ कपिल साहित्य - सु...शांत ☆ बातमी हादरावून सोडणारी होती. काही काम नसल्याने दुपारी झोपलो होतो. जाग आली तेव्हा सवयीने मोबाईल घेतला. मोबाईल डेटा ऑन करून व्हाटसअॅप सुरू केले. सकाळपासून सूरू न केल्याने  एकशे दहांवर समूह व वयक्तीक मॅसेज येऊन पडले होते. असो. एकेक समूहातून शक्य तेवढे मॅसेज वाचायला सुरुवात केली. एका न्यूज चॅनलचा स्क्रीन शाॅट होता.  ज्यात स्पष्ट लिहीलं होतं. कि 'अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत याची गळफास घेऊन आत्महत्या' खरं तर विश्वास बसला नाही. कारण अफवा पसरवणारे एडिटींग काही अशा प्रकारे...
Read More

मराठी साहित्य – कविता ☆ केल्याने होतं आहे रे # 37 –सानेगुरुजी पुण्यतिथी निमित्त – सहनशीलतेचा सागर माझी आई  ☆ – श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे

श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे (वरिष्ठ  मराठी साहित्यकार श्रीमति उर्मिला उद्धवराव इंगळे जी का धार्मिक एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से संबंध रखने के कारण आपके साहित्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक संस्कारों की झलक देखने को मिलती है. इसके अतिरिक्त  ग्राम्य परिवेश में रहते हुए पर्यावरण  उनका एक महत्वपूर्ण अभिरुचि का विषय है।  दिनांक 11 जून  को आदरणीय स्व सदाशिव पांडुरंग साने जी  जो कि आदरणीय साने  गुरूजी के नाम से प्रसिद्ध हैं,  उनकी पुण्यतिथि  के अवसर पर आज प्रस्तुत है श्रीमती उर्मिला जी की रचना  “ सहनशीलतेचा सागर माझी आई ”।  श्रीमती उर्मिला जी के शब्दों में - "सानेगुरुजी पुण्यतिथी निमित्त लिहिलेली माझ्या आईबाबचा लेख आहे ". उनकी मनोभावनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय है।  ऐसे सामाजिक / धार्मिक /पारिवारिक साहित्य की रचना करने वाली श्रीमती उर्मिला जी की लेखनी को सादर नमन। ) ☆ केल्याने होतं आहे रे # 37 ☆ ☆ सहनशीलतेचा सागर माझी आई  ☆    ' आई ' म्हणजे ईश्वर,वात्सल्याचा सागर,मायेचा आगर गोड्या पाण्याचा झरा . . . हे सर्व कवितेत येत त्याला भरपूर लाईक्स पण...
Read More

मराठी साहित्य – आलेख ☆ डॅल्गोना’ कॉफी आणि बरंच काही ☆ श्री अमोल अनंत केळकर

श्री अमोल अनंत केळकर ( ई- अभिव्यक्ति में युवा मराठी साहित्यकार श्री अमोल अनंत केळकर जी का हार्दिक स्वागत है। आप मराठी व्यंग्य  विधा (विडंबन)  के सशक्त हस्ताक्षर हैं। मैं समझता हूँ इस विधा में अभिरुचि केअतिरिक्त  एम बी ए  (मार्केटिंग)  शैक्षणिक योग्यता निःसंदेह पृष्ठभूमि में कार्य करती ही है। श्री अमोल अनंत केळकर जी के ही शब्दों में  उनका परिचय -  "सध्या राहणार बेलापूर नवी मुंबई. ठाण्याजवळ  स्टील कंपनीत नोकरीला. प्रासंगिक लेखन/ विडंबन / चारोळ्या ललित लेखन. 'माझे टुकार ई-चार ' ( www.poetrymazi.blogspot.in)  आणि ' देवा तुझ्या द्वारी आलो' ( www.kelkaramol.blogspot.in) हे दोन ब्लाॅग. यावर नियमीत लेखन. जोतिष शास्त्राची आवड"।  आपका लेखन नितांत सहज  एवं धाराप्रवाह है। आज प्रस्तुत है उनकी विशिष्ट रचना डॅल्गोना' कॉफी आणि बरंच काही .) डॅल्गोना' कॉफी आणि बरंच काही . मंडळी मला कल्पना नाही 'डॅल्गोना'  हा शब्द मी बरोबर लिहिला आहे की नाही पण सध्या याची जबरदस्त क्रेझ सोशल मिडियावर पहायला मिळत आहे.  'डॅल्गोना कॉफी ' ते "डॅल्गोना व्हिस्की" पर्यत झेप या प्रकाराने घेतली आहे. त्यामुळे अर्थातच आम्हाला ही...
Read More

मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सुजित साहित्य # 46 – पत्रलेखन  – ‘आये,  काळजीत नगं काळजात रहा.’ ☆ श्री सुजित कदम

श्री सुजित कदम (श्री सुजित कदम जी  की कवितायेँ /आलेख/कथाएँ/लघुकथाएं  अत्यंत मार्मिक एवं भावुक होती हैं. इन सबके कारण हम उन्हें युवा संवेदनशील साहित्यकारों में स्थान देते हैं। उनकी रचनाएँ हमें हमारे सामाजिक परिवेश पर विचार करने हेतु बाध्य करती हैं. मैं श्री सुजितजी की अतिसंवेदनशील  एवं हृदयस्पर्शी रचनाओं का कायल हो गया हूँ. पता नहीं क्यों, उनकी प्रत्येक कवितायें कालजयी होती जा रही हैं, शायद यह श्री सुजित जी की कलम का जादू ही तो है! आज प्रस्तुत है  उनका एक समसामयिक भावनात्मक  “पत्रलेखन  - 'आये,  काळजीत नगं काळजात रहा.'”। आप प्रत्येक गुरुवार को श्री सुजित कदम जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं। )  ☆ साप्ताहिक स्तंभ – सुजित साहित्य #46 ☆  ☆ पत्रलेखन  - 'आये,  काळजीत नगं काळजात रहा.'☆  कोरोनाच्या संकटामुळे भयभीत झालेल्या  गावाकडील आईस ,  शहरात कामधंद्यासाठी आलेल्या  एका तरूणाने पत्रलेखनातून दिलेला हा बोलका दिलासा जरूर वाचा. पत्रलेखन 'आये,  काळजीत नगं काळजात रहा.' आये. . पत्र लिवतोय तुला. . .  जरा  निवांत बसून वाच. शेरात कामधंद्यासाठी आल्या पासून  आज येळ मिळाला बघ तुला पत्र लिवायला....
Read More

मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कवितेच्या प्रदेशात # 48 – लाॅकडाऊन चे दिवस  ☆ सुश्री प्रभा सोनवणे

सुश्री प्रभा सोनवणे (आज प्रस्तुत है सुश्री प्रभा सोनवणे जी के साप्ताहिक स्तम्भ  “कवितेच्या प्रदेशात” में  “लाॅकडाऊन चे दिवस “।  सुश्री प्रभा जी एवं विश्व में कई लोगों  के जीवन में  ऐसे अनुभव आये हैं जब हमने जीवन का एक नया भयाक्रांत स्वरुप देखा है। पारिवारिक संबंधों  में प्रगाढ़ता एवं जीवन जीने का नया सलीका सीखा है या कहें कि समय ने हमें सिखा दिया है। मानव मन परिवर्तनशील है । भीषण आपदा से गुजरने के बाद शिक्षा लेने के बजाय  बुरे दिन जल्दी ही भूल जाता है । ईश्वर करे उसे सद्बुद्धि दे ।  आरोग्य से बढ़ कर कोई धन नहीं ।  आइये हम सब मिल कर सुश्री प्रभा जी की प्रार्थना की दो  पंक्तियों को सामूहिक स्वरुप दें ।  कहते हैं सामूहिक प्रार्थना  ईश्वर अवश्य सुनते हैं। इस  मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण रचना लिए उनकी लेखनी को सादर नमन ।   मुझे पूर्ण विश्वास है  कि आप निश्चित ही प्रत्येक बुधवार सुश्री प्रभा जी की रचना की प्रतीक्षा करते होंगे. आप  प्रत्येक बुधवार...
Read More

मराठी साहित्य – आलेख ☆ कवी‌ संजीव यांची जयंती…..त्या प्रित्यर्थ त्यांच्या काव्याचा घेतलेला आढावा…….. भाग – 1 ☆डॉ. रवींद्र वेदपाठक

डॉ. रवींद्र वेदपाठक (प्रस्तुत है डॉ रवीन्द्र वेदपाठक जी का मराठी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार  स्व कृष्ण गंगाधर दीक्षित जो कि कवी संजीव उपनाम से  प्रसिद्ध हैं  के  व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित मराठी आलेख  कवी‌ संजीव यांची जयंती.....त्या प्रित्यर्थ त्यांच्या काव्याचा घेतलेला आढावा........। आदरणीय कवी संजीव जी का जन्म 12 अप्रैल को सोलापुर के वांगी गांव में हुआ था। मराठी साहित्य के इस महत्वपूर्ण दस्तावेज की लम्बाई को देखते हुए इसे दो भागों में प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। आज प्रस्तुत है इस आलेख का प्रथम भाग। कृपया इसे गम्भीरतापूर्वक पढ़ें एवं आत्मसात करें। ) ☆  कवी‌ संजीव यांची जयंती..... त्या प्रित्यर्थ त्यांच्या काव्याचा घेतलेला आढावा........  ☆ मराठी साहित्यातील काव्य क्षेत्रात अनेकांनी आपला ठसा उमटवला आहे. आद्य कवी केशवसुतांपासून ते अगदी आजपर्यंत अनेकांनी आपल्या दर्जेदार काव्याची निर्मिती करून वाचकांना जणू भुरळच घातली आहे. या काव्य क्षेत्रात आपल्या लीलया लेखणीने मुशाफिरी करून कवितेबरोबरच *लावणी, अभंग, शायरी इ. प्रकार निर्माण करून काव्यगगनात ध्रुवता-याप्रमाणे अढळ झालेले थोर गीतकार म्हणजे संजीव!* *कृष्ण गंगाधर दीक्षित* यांचा जन्म दि. १२...
Read More

मराठी साहित्य – आलेख ☆ बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर जयंती विशेष – आंबेडकरी जनता आणि ऑनलाइन जयंती उत्सव ☆ श्री कपिल साहेबराव इंदवे

श्री कपिल साहेबराव इंदवे  (युवा एवं उत्कृष्ठ कथाकार, कवि, लेखक श्री कपिल साहेबराव इंदवे जी का एक अपना अलग स्थान है. आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशनधीन है. एक युवा लेखक  के रुप  में आप विविध सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के अतिरिक्त समय समय पर सामाजिक समस्याओं पर भी अपने स्वतंत्र मत रखने से पीछे नहीं हटते। आज प्रस्तुत है परम आदरणीय  बाबासाहेब भीमराव आम्बेडकर जी  की जयंती के अवसर पर उनका विशेष आलेख  आंबेडकरी जनता आणि ऑनलाइन जयंती उत्सव।    ☆ आंबेडकरी जनता आणि ऑनलाइन जयंती उत्सव☆   सध्या जगभरात कोरोनाने जो हाहाकार माजवला आहे. त्यात जगभरातून लाखांवर बळी गेलेत. एका जागी कधी न थांबणारा माणसाने स्वतःला एका जागी कोंडून ठेवलेय. आणि याचा प्रादुर्भाव वाढु नये म्हणून जगभरातील सरकारे आपापल्या परीने प्रयत्न करताहेत. आणि सगळ्या जगाला कळून चुकले की स्वतःला घरात ठेवण्या शिवाय सध्यातरी पर्याय नाहीये. म्हणूनच लाॅकडाऊनचा पर्याय सध्या प्रभावी मानला जातोय आणि भारताने सुद्धा हाच पर्याय निवडला आहे. भारतीय राज्यघटनेच्या कलम 144 देशात लागू आहे. आणि पुर्णपणे संचारबंदी लागू आहे. अशा परिस्थितीत श्रीराम नवमी,...
Read More

मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सुजित साहित्य # 40 – पत्रलेखन – आये, काळजीत नगं काळजात रहा ☆ श्री सुजित कदम

श्री सुजित कदम (श्री सुजित कदम जी  की कवितायेँ /आलेख/कथाएँ/लघुकथाएं  अत्यंत मार्मिक एवं भावुक होती हैं. इन सबके कारण हम उन्हें युवा संवेदनशील साहित्यकारों में स्थान देते हैं। उनकी रचनाएँ हमें हमारे सामाजिक परिवेश पर विचार करने हेतु बाध्य करती हैं. मैं श्री सुजितजी की अतिसंवेदनशील  एवं हृदयस्पर्शी रचनाओं का कायल हो गया हूँ. पता नहीं क्यों, उनकी प्रत्येक कवितायें कालजयी होती जा रही हैं, शायद यह श्री सुजित जी की कलम का जादू ही तो है! आज प्रस्तुत है  उनके द्वारा शहर में आये एक युवक द्वारा अपनी माँ को  लिखा गया अत्यंत भावुक एवं मार्मिक पत्र  “आये, काळजीत नगं काळजात रहा”। आप प्रत्येक गुरुवार को श्री सुजित कदम जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं। )  ☆ साप्ताहिक स्तंभ – सुजित साहित्य #40 ☆  ☆ पत्रलेखन - 'आये, काळजीत नगं काळजात रहा.' ☆  (कोरोनाच्या संकटामुळे भयभीत झालेल्या  गावाकडील आईस ,  शहरात कामधंद्यासाठी आलेल्या  एका तरूणाने पत्रलेखनातून दिलेला हा बोलका दिलासा जरूर वाचा.) पत्रलेखन 'आये, काळजीत नगं काळजात रहा.' आये. . पत्र लिवतोय तुला. . .  जरा  निवांत बसून...
Read More

मराठी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कवितेच्या प्रदेशात # 43 – समारोप ☆ सुश्री प्रभा सोनवणे

सुश्री प्रभा सोनवणे (आज प्रस्तुत है सुश्री प्रभा सोनवणे जी के साप्ताहिक स्तम्भ  “कवितेच्या प्रदेशात” में  एक अविस्मरणीय संस्मरण  “समारोप “। वास्तव में जीवन के कुछ अविस्मरणीय क्षण होते हैं जिन्हें हम आजीवन विस्मृत नहीं कर सकते । वे क्षण कुछ भी हो सकते हैं  किन्तु,  हाईस्कूल से कॉलेज में पदार्पण के पूर्व हाईस्कूल का फेयरवेल जिसमें लड़कियां साड़ियां और लडके फॉर्मल्स में  सम्मिलित होते हैं, बेहद रोमांचक क्षण होते हैं। उस समय की मित्रता और  भविष्य के स्वप्न संजोते ह्रदय का स्मरण कर या मित्रों में साझा कर एक रोमांच का अनुभव होता है और लगता है  कि  काश वे दिन एक बार पुनः लौट आते जो कि असंभव हैं।  सुश्री प्रभा जी ने उन क्षणों को अपने इस संस्मरण से सजीव कर दिया है। इस भावप्रवण अप्रतिम  सजीव संस्मरण  साझा करने के लिए उनकी लेखनी को सादर नमन ।   मुझे पूर्ण विश्वास है  कि आप निश्चित ही प्रत्येक बुधवार सुश्री प्रभा जी की रचना की प्रतीक्षा करते होंगे. आप  प्रत्येक बुधवार को...
Read More

मराठी साहित्य – आलेख ☆ कोरोना व्हायरसमुळे देशभरात होणारे स्थलांतर,त्याचा वाढता धोका आणि आपली जबाबदारी☆ कविराज विजय यशवंत सातपुते

कविराज विजय यशवंत सातपुते (समाज , संस्कृति, साहित्य में  ही नहीं अपितु सोशल मीडिया में गहरी पैठ रखने वाले  कविराज विजय यशवंत सातपुते जी  की  सोशल मीडिया  की  टेगलाइन “माणूस वाचतो मी……!!!!” ही काफी है उनके बारे में जानने के लिए। जो साहित्यकार मनुष्य को पढ़ सकता है वह कुछ भी और किसी को भी पढ़ सकने की क्षमता रखता है।आप कई साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। कुछ रचनाये सदैव समसामयिक होती हैं। आज प्रस्तुत है आपकी एक समसामयिक विषय पर  एक शिक्षाप्रद आलेख  “कोरोना व्हायरसमुळे देशभरात होणारे स्थलांतर,त्याचा वाढता धोका आणि आपली जबाबदारी“।) ☆ कोरोना व्हायरसमुळे देशभरात होणारे स्थलांतर,त्याचा वाढता धोका आणि आपली जबाबदारी ☆ संवाद एक विचार अनेक चर्चा सत्र  कोरोना विषाणू जागतिक संकटातून बचावात्मक प्रतिबंधक उपाय म्हणून हा लाॅकडाऊन याची गांभीर्याने  सर्व प्रथम दखल घ्यायला हवी.  दारिद्र्य रेषेखालील लोकांना  उपासमारी,  बेरोजगारी सहन करावी लागत आहे पण महापालिका प्रशासनाने पुरेशी खबरदारी घेतली आहे.  सध्या स्थलांतर करण्यापेक्षा आहे त्या निवा-यात सुरक्षित राहून कोरोना प्रतिबंधकात्मक उपाय करणे अत्यंत आवश्यक आहे. जसे वारंवार हात धुणे. घरात स्वच्छता ठेवणे. टाॅयलेट बाथरूम स्वच्छ...
Read More
image_print