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सफरनामा-नर्मदा की असफल प्रेम कथा-4 – श्री सुरेश पटवा

नर्मदा की असफल प्रेम कथा-4            आर्यों के साहित्य में यह चीज़ बार-बार मिलती है कि उन्होंने अनार्यों से वैवाहिक सम्बंध बनाकर अपने में मिला लिया। यही बात नर्मदा के प्रेम प्रसंग में भी दिखती है। लोक कथा में नर्मदा को रेवा नदी और शोणभद्र को सोनभद्र के नाम से जाना गया है। राजकुमारी नर्मदा राजा मेखल (महाकाल) की पुत्री थी। राजा मेखल ने अपनी अत्यंत रूपसी पुत्री के लिए यह तय किया कि जो राजकुमार गुलबकावली के दुर्लभ पुष्प उनकी पुत्री के लिए लाएगा वे अपनी पुत्री का विवाह उसी के साथ संपन्न करेंगे। पड़ौसी राज्य के राजकुमार सोनभद्र गुलबकावली के फूल ले आए अत: उनसे राजकुमारी नर्मदा का विवाह तय हुआ। नर्मदा अब तक सोनभद्र के दर्शन ना कर सकी थी लेकिन उसके रूप, यौवन और पराक्रम की कथाएं सुनकर मन ही मन वह भी उसे चाहने लगी। विवाह होने में कुछ दिन शेष थे लेकिन नर्मदा से रहा ना गया उसने अपनी दासी जुहिला के हाथों प्रेम संदेश भेजने की...
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सफरनामा-नर्मदा घाटी का ऐतिहासिक महत्व-3 – श्री सुरेश पटवा

नर्मदा घाटी का ऐतिहासिक महत्व - 3            प्रस्तुत है सफरनामा – श्री सुरेश पटवा जी की खोजी कलम से (इस श्रंखला में आप पाएंगे श्री पटवा जी की ही शैली में पवित्र नदी नर्मदा जी से जुड़ी हुई अनेक प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक रोचक जानकारियाँ जिनसे आप संभवतः अनभिज्ञ  हैं।) सनातनी हिंदुओं के लिए नर्मदा नदी का धार्मिक महत्व है क्योंकि परम्परा में जल को देवता और नदियों को देवियाँ मानकर पूजा जाता रहा है। प्रकृति और पंचभूत अन्योनाश्रित हैं। प्रकृति है तो पंचभूत हैं और पंचभूत हैं तो प्रकृति है। पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश हमारे आभासी ब्रह्माण्ड में हैं और मानव देह समस्त ब्रह्माण्ड को अपने भीतर समेटे हुए है इसलिए प्रथम कृति नियंता की प्र+कृति है। इसी में से आना है और इसी में समा जाना है। हिंदू मान्यता के अनुसार पुरुष का एक अंश आत्मा रूप में प्रकृति में जीव की संरचना करता है तब जीव जगत अस्तित्व में आता है। प्रकृति के अंगों का अध्ययन प्राकृतिक भूगोल कहलाता...
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सफरनामा-नर्मदा नदी का प्राकृतिक विवरण-2 – श्री सुरेश पटवा

नर्मदा नदी का प्राकृतिक विवरण-2            प्रस्तुत है सफरनामा – श्री सुरेश पटवा जी की खोजी कलम से (इस श्रंखला में आप पाएंगे श्री पटवा जी की ही शैली में पवित्र नदी नर्मदा जी से जुड़ी हुई अनेक प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक रोचक जानकारियाँ जिनसे आप संभवतः अनभिज्ञ  हैं।) उद्गम - मेकल पर्वत श्रेणी, अमरकंटक समुद्र तल से ऊंचाई - 1051 मीटर म.प्र में प्रवाह - 1079 किमी कुल प्रवाह (लम्बाई) - 1312 किमी नर्मदा बेसिन का कुल क्षेत्रफल - 98496 वर्ग किमी राज्य - मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात विलय - भरूच के आगे खंभात की खाड़ी सनातन मान्यता। नर्मदा जी वैराग्य की अधिष्ठात्री है गंगा जी ज्ञान की, यमुना जी भक्ति की, ब्रह्मपुत्रा तेज की, गोदावरी ऐश्वर्य की, कृष्णा कामना की और सरस्वती जी विवेक के प्रतिष्ठान की। सनातन परम्परा में सारा संसार इनकी निर्मलता और ओजस्विता व मांगलिक भाव के कारण आदर करता है। श्रद्धा से पूजन करता है। मानव जीवन में जल का विशेष महत्व है। यही महत्व जीवन को स्वार्थ, परमार्थ से जोडता है। प्रकृति और मानव का गहरा संबंध है। नर्मदा तटवासी माँ...
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सफरनामा-नर्मदा परिक्रमा:ग्वारीघाट से सर्रा घाट-1 – श्री सुरेश पटवा

नर्मदा परिक्रमा:ग्वारीघाट से सर्रा घाट - 1 प्रस्तुत है सफरनामा - श्री सुरेश पटवा जी की खोजी कलम से (इस श्रंखला में आप पाएंगे श्री पटवा जी की ही शैली में पवित्र नदी नर्मदा जी से जुड़ी हुई अनेक प्राकृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक रोचक जानकारियाँ जिनसे आप संभवतः अनभिज्ञ  हैं।) नर्मदा अमरकण्टक से निकलकर डिंडोरी-मंडला से आगे बढ़कर पहाड़ों को छोड़कर दो पर्वत श्रंखलाओं, दक्षिण में सतपुड़ा और उत्तर में कैमोर से आते हुए विंध्य के पहाड़ों से समानांतर दस से पंद्रह किलोमीटर की दूरी बनाकर अरब सागर की तरफ़ कहीं उछलती-कूदती, कहीं गांभीर्यता लिए हुए, कहीं पसर के और कहीं-कहीं सिकुड़ कर बहती है। उसके अलौकिक सौंदर्य और उसके किनारे स्निग्ध जीवन के स्पंदन की अनुभूति के लिए पैदल यात्रा पर निकल रहे हैं। कुछ लोगों ने इस यात्रा पर चलने की इच्छा जताई थी। यह यात्रा वानप्रस्थ के द्वारा सभ्रांत मोह से मुक्ति का अभ्यास भी है। जिस नश्वर संसार को एक दिन अचानक छोड़ना है क्यों न उस मोह को धीरे-धीरे...
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