श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ३३ ☆
☆ लघुकथा ☆ ~ निक्षय मित्र एवं क्षय मुक्त ग्राम पंचायत (क्षय मुक्त भारत की संकल्पना) ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆
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आज सुबह-सुबह सेतु पटमंगरा के ग्राम प्रधान श्री दिनेश लाल के घर पहुंच गया था।
कहो सेतु कैसे आना हुआ ?
अरे प्रधान जी.. आपसे एक बात करनी थी। … सेतु ने कहा।
क्या है, ? बताओ क्या कहना चाहते हैं ? प्रधान जी ने पूछा।
प्रधान जी… आप तो जानत हैं कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है। इससे मुक्ति का बड़ा अभियान चला है।
अरे सेतु..हमने तो सुना है कि यह दवाई से बिल्कुल ठीक हो जाती है… इसके अलावा भी कोई दुसरा उपाय है क्या, ? दिनेश लाल प्रधान ने पूछा।
प्रधान जी… यह बीमारी ठीक तो होगी इलाज से ही लेकिन एक बात आप पहले बताइये कि ये बीमारी किसको पहले होती है? सेतु ने पूछा।
प्रधान जी ने अपना दिमाग दिमाग दूर तक दौडाया। उन्हें अपने गांव के टीबी रोगी मंगरु, बसंती, ननकू की याद आई।
सेतु अभी भी प्रधान जी के घर पर ही बैठा था।
किस सोच में डूब गये प्रधान जी ?
सेतु..बाबू तू ऐसा सवाल हमारे सामने रख दिए हो कि हमारे दिमाग़ में बहुत बड़ा टेंशन पैदा हो गया है।
हम सोचत है किये टीबी की बीमारी, कुलेश्वर भैया, रघुनंदन काका, और दूधनाथ मास्टर के घर के लोगो को क्यों नहीं होता है। आखिर ये बीमारी मंगरु, बसंती, ननकू जैसे लोगो के घर में क्यों आता है?
सेतु ने प्रधान जी के मन की बात समझ ली थी। अब सही वक्त आ गया था जब सेतु को हथौड़े की चोट गरम लोहे पर करना था।
क्षय मुक्त भारत अभियान से भी वह जुड़ चुका था। टीबी के विषय में एक-एक जानकारी उसके दिमाग में रटी पड़ी थी।
क्षय उन्मूलक अभियान के हर -एक हिस्से का वह साथी बन चुका था।
अब सेतु ने जो बात दिनेश लाल प्रधान से कहीं वह बात प्रधान के दिमाग में जम गई।
प्रधान जी.. पहली बात की है बीमारी किसी को भी हो सकती है। चाहे वह किसी भी तरह का व्यक्ति हो अमीर हो या गरीब हो। बीमारी ऐसी है कि जहां भी खान-पान में कमी होती है, जहां पौष्टिक आहार नहीं मिलता है, ऐसे लोगों में रोग से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और उसे टीबी की बीमारी पकड़ने का भय पहले होता है।
अरे सेतु.. सही बताएं हो, यही कारण है कि पश्चिम टोला के मंगरु बसंती ननकू को टीबी की बीमारी पकड़ी है।
इन तीनों जने की आर्थिक स्थिति थोड़ी ठीक नही है।
काम धाम की कमी, ऊपर से बीमारी। और बीमारी में कोई काम धाम कैसे कर सकता है। इन सारी समस्यायों के जड़ में खान पान की कमी भी एक है। ऐसे बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनको कई अन्य जटिल बीमारियां है, जैसे शुगर, बीपी, कैंसर, एच आई वी आदि उनके भीतर भी रोग लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। उनके भी भीतर भी रोग से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, और टीबी की बीमारी हो जाती है।
सेतु यह बताते बताते रुक गया। और दुबारा कुछ बात ऐसा बोला कि वहां बैठे कई लोग उसे घूर के देखने लगे।
सेतु ने कहा प्रधान जी, जो लोग नसे का सेवन करते है, बीड़ी, गांजा, शराब आदि नसे की चीज खाते पीते हैं ऐसे लोगों में भी टीबी की बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
अरे प्रधान जी… आप गांव के मुखिया हौ। आपका एक नई बात बताना चाहता हूँ.. सुनिए .सेतु ने कहा।
अब सेतु ने दिनेश लाल प्रधान से विस्तार में बताना शुरू किया।
सरकार ने एक अभियान छेड़ रखा है। जिसको क्षय मुक्त भारत अभियान कहते हैं। इसमें जांच इलाज के अलावा हर एक क्षय रोगी को इलाज के दौरान ₹1000 की सहायता राशि मिलती है।
अरे सेतु यह तो ₹500 मिलता था कब से यह ₹1000 हो गया। … दिनेश लाल प्रधान ने पूछा।
आप का जान पाएंगे …प्रधान जी ! नन्हकऊ से पूछिएगा न। सेतु ने बड़े ही दम के साथ कहा।
अच्छा तो सरकार ने 500 से ₹1000 कर दिया। बहुत बड़ी बात है भाई..यह तो बहुत बड़ी बात है। दिनेश लाल प्रधान के चेहरे पर आत्मसंतुष्टि और सरकार के प्रति कृतज्ञता का भाव झलक रहा था।
सेतु अपनी बात को यहीं समाप्त करने वाला नहीं था। उसे तो अभी बहुत कुछ और बताना था।
प्रधान जी.. इतनी ही बात नहीं है। जिसके घर में टीबी के मरीज है उनके संपर्क में रहने वालों को एक्स रे जांच के बाद टीपीटी भी दवाई दी जा रही है, ताकि टीबी की बीमारी उनके घर वालों में न जाए।
अब आपको, आपके काम की बात बताना चाहता हूँ..प्रधान जी ! सेतु ने कहा। ।
जो लोग टीबी के रोगियों को गोद लेंगे और उनको इलाज तक खाने के लिए पौष्टिक आहार की टोकरी देंगे। उनको सरकार सम्मानित करेंगी।
प्रधान भैया !! जिसके पास पैसा रूपया है। धन दौलत भरा पड़ा है। साथ ही साथ गरीब मजबूर लोगों को कुछ करने की इच्छा रखते है। ऐसे लोगों को आगे बढ़कर हमारे गरीब टीबी रोगियों को गोद लेना चाहिए
गोद लेने का का मतलब हुआ.. सेतु?… प्रधान जी ने पूछा
अरे प्रधान जी ! दुनिया भर को आप बताते हैं और आप ये बात पूछ रहे हैं?
गोद लेने का मतलब हुआ कि उस मरीज को प्रति माह पौष्टिक आहार की किट ( टोकरी ) देना और तब तक देना जब तक की उसका इलाज पूरा न हो जाए।
जानते हैं प्रधान जी जब टीबी रोगी को पौष्टिक आहर की किट मिलेगी तो, रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ जायेगी और उसका रोग जल्दी से भागेगा।
सेतु ने एक नई बात बात प्रधान जी को बता दी।
अरे सेतु..तो हमारे गांव के जो तीन रोगी मगरु, नन्हकउ और बसंती रहे, उनको भी किसी ने पौष्टिक किट दिया था क्या, ?
सेतु जोर से हंस पड़ा…
अरे प्रधान जी.. आप को पता नहीं है क्या . इन लोगों को भी किट दिया गया है।
देवनाथ सिंह मास्टर साहब, .. जो मिडिल स्कूल के हेडमास्टर जी है, उन्होंने इन तीनों को गोद लिया था। पूरे इलाज तक वे बसंती और मंगरु को पौष्टिक पोषण किट देते रहे हैं अब तक भी ननकू को देरहे थे।
दिनेश लाल प्रधान, कुछ देर के लिए मन ही मन सोचते रहे …
भाई.. ई सेतु भी गजब का इंसान है ..
खुद का खुद टीबी से बीमार रहा। इसकी बहुरिया सुघरी टीबी के मरीज थी, फिर भी उससे शादी किया।
ठीक होने के बाद लगा पड़ा है, टीबी रोगी की सेवा में। यह हमरे गांव के मणि है। किसी देवदूत से कम नही है। जो काम हम लोगो को करना चाहिए, यह वह सब कर रहा है।
हम इसके लिए जरूर कुछ ना कुछ जरूर करेंगे … दिनेश लाल प्रधान ने मन ही मन ठान लिया।
उन्होंने अपने गांव के ही नहीं, बल्कि अपने आस पास के गांव के भी गरीब मरीज को गोद लेने का मन बना लिया। सेतु के कहने पर उन्होंने दूसरे गांव के करीब 35 क्षय रोगियों को गोद ले लिया था।
समय बीतते देर नहीं लगी। गांव के तीनों रोगी ठीक हो चुके थे। मंगरु और बसंती तो पहले ही ठीक हो गए।
नन्हकू की रिपोर्ट लेकर आज सेतु आया था। रिपोर्ट के साथ ही प्रधान जी के घर पहुंचा था। प्रधान जी के दरवाजे पहुंचते ही बोला… प्रधान जी ! आज आपको मिठाई खिलाना पड़ेगा।
किस बात की मिठाई.. सेतु ? प्रधान जी ने पूछा।
अरेे आपका नन्हकू की भी रिपोर्ट आ गई है। वह भी ठीक हो गया है।
अब क्या..एक जश्न जैसा माहौल प्रधान जी के दरवाजे पर बन गया।
प्रधान जी के दरवाजे पर बैठे लोगों के बीच खुशी की लहर दौड़ गयी।
घर के आगे दुवारे तीन चार खटिया, दो लकड़ी का बेंच, दो चौकी – तखत पड़ी थी
प्रधान जी कोई अलग नही बैठे थे। वे भी एक चारपाई के गोड़ तारी की ओर बैठे थे।
कवलेसर ने कहा .. अरे प्रधान जी, गांव के मुखिया है, सिरहाने बैठिये, ..सिरहाने।
दिनेश बोले.. अरे कौलेसर भईया, .. प्रधान होने से क्या हुआ। हम अपनी मर्यादा भूल के बड़कउ के सिरहाने बैठेंगे क्या। हमारा यह संस्कार नही है।
सामने चारपाई पर बैठे जितने भी लोग थे, वे सभी प्रधान जी की मानहि मन भूरी भूरी प्रशंसा कर रहे थे।
अचानक दूर से एक सरकारी गाडी आती हुई दिखाई दी
गाड़ी रुकी तो उसमें ड्राइवर के अलावा दो लोग उतरे।
अरे प्रधान जी… भावेश भैया आ गये.. सेतु ने कहा
देखो आज कौन नई खबर लेकर आए हैं? भावेश क्षय उन्मूलन कार्यकर्ता था। उससे दिनेश लाल प्रधान और सेतु दोनों परिचित थे। लेकिन दूसरे व्यक्ति को दिनेश लाल प्रधान नही पहचाते थे
सेतु ने उनका परिचय कराते हुए कहा ..
प्रधान जी ये श्री आनन्द कृष्ण जी है, स्टेट से हमारे जनपद में विजिट पर आये थे। ये आपके लिए कोई खास खबर लेकर आए हैं।
श्री आनन्द कृष्ण जी के बैठने के लिए प्रधान जी खुद कुर्सी लेकर आए।
आईये बैठिये..साहब। हमारा सौभाग्य है आप हमारे दरवाजे पर आए है।
प्रधान जी ने बबलू से चाय पानी बनाने के लिए बोला, तो बबलू चाय पानी लाने घर में चला गया।
और बताइए सर, क्या नई बात है… दिनेश लाल जी ने श्री आनन्द कृष्ण जी से पूछा
जी प्रधान जी….आपको भावेश ही पूरी बात बताएंगे।
अरे प्रधान जी आपको क्या बताना है आप तो इस इलाके के प्रतिष्ठित लोगों में है।
हमें आपको दो नई खबरें देनी है शायद आप इन दोनों खबरों के विषय में आप नहीं जान रहे होंगे।
दिनेश लाल प्रधान, हक्का-बक्का थे, आखिर कौन सी दो खास खबरें है जो उन्हें पता नहीं था।
लेकिन भावेश ने सिर्फ एक एक बात बतायी, वह यह कि जो हमारे जो तीन क्षय रोगी थे, वे अब सभी तीनों ठीक हो गये है। दो की तो रिपोर्ट पहले ही आ गई थी। आज सेतु नन्हकू की भी रिपोर्ट लेकर आए हैं। वह भी ठीक हो गए हैं।
अब अपने गांव में कोई भी टीबी का रोगी नहीं है
अब इस खुशी में आप सबका मुंह मीठा कराइये।
इसी बीच स्टेट से आए हुए श्री आनन्द कृष्ण जी बोल पड़े। इतने से काम नहीं चलेगा..प्रधान जी सब लोग आपसे बड़ी पार्टी लेंगे। अब आप दूसरी खुशी की बात तो सुनिए।
सब लोग श्री आनन्द कृष्ण जी की बात को ध्यान से सुन रहे थे
प्रधान जी आपने दूसरे गांव के 35 मरीजों को गोद लिया है.. याद है ना.., इनमे से भी 10-12 मरीज ठीक हो गये हैं। आपने इतने सारे मरीजों को गोद लिया है, इस संदर्भ में आपको इसी महीने 24 मार्च को लखनऊ आना है। विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी आप सहित कुल पच्चास निक्षय मित्रों को सम्मान्नित करेंगे।
इस खबर को सुनकर प्रधान जी की आंखें भर आयीं। आठ बरस के अपने प्रधानी के कार्यकाल में प्रधान जी को ऐसी खुशखबरी इसके पहले सुनने को नही मिलीं थी। दिनेश लाल प्रधान स्वयं को भाग्यशाली महसूस कर रहे थे कि उन्हें माननीय मुख्यमंत्री जी के हाथो से सम्मान मिलना है।
खुशी से उनकी आंखें गीली हुई तो सेतु ने गमछे से उनकी आँखे पोछ दी। दिनेश लाल… स्वयं को आदर्श गांव पटमंगरा के प्रधान के रूप में गौरवान्वित पा रहे थे।
झउआ भर तुरई की सब्जी, और नारी के भाजी लेकर नन्हकू घर सुबह-सुबह प्रधान जी के घर पहुंचे थे। जबसे उन्होंने अपनी रिपोर्ट निगेटिव आने की खबर सुनी तो उनका मन खुशी से भर गया। ये खबर उनको सेतु से मिली थी। उनको उनकी मेंहरिया ने कहा था कि इस खुशी के मौक़े पर प्रधान जी के घर कुछ साग भाजी पहुंचा आओ।
ननकू भी प्रधान जी के दरवाजे पर मौजूद थे सभी लोग नन्हकू की तरफ ध्यान से देखने लगे।
नन्हकू ने कहा कि भावेस भईया, टीबी अस्पताल वाले डॉक्टर साहब और अपने प्रधान जी इन तीनों का एहसान हम नहीं चुकता सकते। इस खुशी में हम प्रधान जी के लिए थोड़ी बहुत साग भाजी लाए हैं।
इस अद्भुत उपहार को परिभाषित करने के लिए अब कोई शब्द नहीं बचा था।
इधर कई महीनों से स्वास्थ्य विभाग की टीम पटमंगरा गाँव में लगातार आ रही थी। संभावित लक्षण वाले लोगों के सैंपल लिए जा रहे थे। लेकिन आगे क्या होने वाला है यह कोई नहीं जान नही पा रहा था।
भावेश, सेतु और श्री आनन्द कृष्ण जी सभी लोग दरवाजे पर पड़ी बेंत से बुनी लकड़ी की कुर्सियों पर बैठे हुए थे।
श्री आनन्द कृष्ण जी ने जब एक और बात की घोषणा की कि –
भाई लोग एक खुशखबरी और सुनिए –
माननीय प्रधानमंत्री जी ने भारत को क्षय मुक्त करने का संकल्प लिया है।
भीड़ में ही बैठे एक नौजवान ने बीच में टोकते हुए कहा कि –
हमें पता है, जब हमारे गांव क्षय मुक्त होंगे तो जिले क्षय मुक्त होंगे और जब जिले क्षय मुक्त होंगे तो प्रदेश क्षय मुक्त होगा और प्रदेश क्षय मुक्त होगा तो हमारा देश क्षय मुक्त हो जाएगा।
अपने गाँव के नौजवानो के भीतर का यह ज्ञान प्रधान जी सहित पूरी भीड़ को उत्साहित कर रहा था।
आखिरकार श्री आनन्द कृष्ण जी ने दूसरे राज को भी खोलते हुए कहा –
भाई लोग..आप लोगों को जानकर ख़ुशी होंगी कि आप का गांव पटमंगरा क्षय मुक्त गांव घोषित हो चुका है।
प्रधान जी के द्वार पर बैठे लोंगो में खुशी की लहर दौड़ गई सब ने तालियां बजायीं।
सबकी बधाई ग्राम पंचायत पटमंगरा के प्रधान श्री दिनेश लाल जी के लिए थी।
आगे श्री आनन्द कृष्ण जी जी ने बताया कि अगले 2 अक्टूबर को आपके गांव के प्रधान जी को माननीय जिलाधिकारी महोदय के हाथों गांधी जी की कास्य प्रतिमा देखकर सम्मानित किया जाएगा तालिया के गड़गड़ाहट से पूरा माहौल दुबारा खुशियों से भर उठा।
पटमंगरा क्षय मुक्त गांव घोषित हो चुका था। प्रधान जी अपने स्थान पर खड़े हुए। घर के भीतर से उन्होंने एक उनी शॉल मंगवायी। सब मिलकर सेतु का सम्मान कर रहे थे। सेतु को प्रधान जी ने जब गले लगाया तो इस दृश्य को देखकर सुघरी की आंखें खुली की खुली रह गयी। जिस सेतु को वह भला बुरा कह रही थी, आज उसे अपने सेतु पर गर्व हो रहा था।
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© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”
लखनऊ, उप्र, (भारत )
दिनांक 22-02-2025
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈













