श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “इत्ती सी खुशी…“।)
अभी अभी # १०३३ ⇒ आलेख – इत्ती सी खुशी
श्री प्रदीप शर्मा
खुशी बड़ी छोटी नहीं होती, खुशी, सिर्फ खुशी होती है। प्रकृति का चितेरा कवि विलियम वर्ड्सवर्थ जब हजारों डेफोडिल्स को एक साथ खिला हुआ देखता है, तो अनायास कह उठता है, thousands I saw at a glance ! यानी सिर्फ एक झलक ही काफी होती है, कुदरत के नजारे को आत्मसात करने के लिए ! और वह कह उठता है,
A thing of beauty, is joy for ever. पलक बंद कर लूं, कहीं छलक ही न जाए। मुझे खुशी मिली इतनी, कि मन में न समाए।
बच्चों की छोटी सी बंद मुट्ठी में सपने ही सपने होते हैं, खुशियां ही खुशियां होती हैं। उनकी खुशियों में महल नहीं होते, इत्ती सी चीज के लिए वे मचल जाते हैं, आसमान सर पर उठा लेते हैं।मुझे चांद चाहिए। कितनी बड़ी मांग, कितना बड़ा हठ। बालहठ ! मां समझती है, वह पानी में चांद की परछाई ला देती है। इत्ती सी खुशी। बच्चा खुश। बच्चे छोटी छोटी सी बात पर ताली बजाने लगते हैं, खुश होकर नाचने लगते हैं। बड़े सोचते हैं, इत्ती सी खुशी और इत्ता बड़ा इज़हार। और अगर यही बड़े करें, तो लोग उन्हें पागल समझें। बड़े लोग न इत्ती सी खुशी समझते हैं, और न इत्ती सी बात।।
प्यार में खुशी भी शामिल होती है। प्यार को चाहिए, बस एक नजर, एक नज़र। नजर उठती है, मिलती है, और झुक जाती है।
कितने कम समय में कितना बड़ा काम। ऐ प्यार तुझे सलाम। ढाई आखर ही तो हैं प्यार के।अंग्रेजी में बोलें तो ढाई शब्द ! I love you. इत्ते कम शब्दों में खुशी कहां से कहां पहुंच जाती है। प्यार दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच जाता है।
दो मीठे शब्द बोलने में क्या जाता है। इत्ता सा काम, और कितना बड़ा ईनाम ! आप चाहें तो राई का पहाड़ बनाएं, अथवा गर्म गर्म कढ़ाई में इत्ती सी राई डालें। इत्ती सी राई कमाल बता देती है। इत्ती सी हींग, इत्ता सा जीरा लेकिन कित्ता सारा स्वाद। इत्ते में कित्ता मज़ा। अधिक तेल, खटाई, मसाला, सज़ा ही सज़ा।।
हमारे पास पैसा, धन दौलत, रुतबा और ओहदा और इज्ज़त सम्मान होते हुए भी कितने गरीब हैं हम, अगर हममें भाव का अभाव है। खुशी और प्यार, भाव का खेल है। बहुत खुश हैं आप, इत्ती सी खुशी बांटें भी। लोग आपको प्यार करते हैं, इत्ता सा प्यार आप भी तो बांटें ! किसी का इत्ता सा दुख भी बांटकर देखें, कित्ता संतोष होता है। गर्मी और उमस में, जब हम पसीने पसीने हो रहे होते हैं, कहीं से इत्ता सा हवा का झोंका आता है, हमारी सब गर्मी दूर कर जाता है। भाव और अभाव में, इत्ता सा अंतर होता है।
आप क्या दे सकते हैं भगवान को। सिर्फ भाव से भोग लगा सकते हैं, वे इत्ता सा भी नहीं खाते। वे सिर्फ भाव के भूखे हैं। आपने जो भोग लगाया, वह ईश्वर का प्रसाद हो गया। इत्ता सा प्रसाद कितनों तक पहुंच जाता है।
सिर्फ भाव का भोग है यह, प्रसाद का नहीं। इत्ता सा प्रसाद, कित्ता सारा भाव।।
एक चिड़िया पल भर के लिए आपके सामने आती है, दाना चुगकर चली जाती है, आप खुश हो जाते हैं। इत्ती सी खुशी दे गई वह आपको। रात को आपके गमले में जो कली मुस्कुराई थी, आज सुबह वह फूल बन गई। आप इत्ती सी खुशी भी किसी के साथ बांटना चाहते हैं। सुना है बांटने से खुशी बढ़ती है, और दुख कम होता है।।
इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकलें। यह इतना शब्द कितना बड़ा है, कोई नहीं जानता। इत्ती सी बात है, लोग समझ जाएं तो क्या बात है। आप किसी बच्चे की चॉकलेट में से, इत्ती सी चॉकलेट मांगकर देखें, वह नहीं देगा। मेरी है ! बच्चों का इत्ता, कित्ता बड़ा होता है, जितनी उनकी हथेली, जितना उनका कद। जब उनके छोटे छोटे हाथ इशारा करके बताते हैं कि मेरे पास इत्ते सारे खिलौने हैं, तब उनकी खुशी देखते ही बनती है।
आप भी तलाशिए अपने अंदर, अपने आसपास, इत्ती सी खुशी, इत्ता सा प्यार। समेट लें, जितना समेट सकें, और हमें भी बांट दें, इत्ती सी खुशी, इत्ता सा प्यार। हमारे आसपास, ना कोई दुखी रहे, ना कोई उदास। लो, एक कली मुस्काई।।
© श्री प्रदीप शर्मा
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