श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – कर्तव्य।)
☆ लघुकथा # १०६ – कर्तव्य ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
आशा जी अपने एक बैग में किताबें भरकर जल्दी-जल्दी अपने कदम बढ़ाते हुए ऑटो रिक्शा में बैठकर सिटी के बीच स्थित हिंदी लाइब्रेरी में पहुंच जाती हैं। जैसे ही वे गेट के अंदर जाती है, पक्षियों की चहचहाहट का मनोरम संगीत माहौल को खुशनुमा बना रहा था।
बाहर एक टेबल पर अखबार और तरह-तरह की मैगजीन रखी थी।
नगर के सभी वरिष्ठ नागरिक यहाँ पर आकर अखबार पढ़ते हैं और वे अपने बच्चों के अच्छे कपड़े, किताब, कॉपी, जैकेट एवं जूते सब यहाँ एक कोने में अलमारी में रख देते हैं जरूरतमंद अपने घर ले जाते हैं।
यह देखकर आशा जी को बहुत अच्छा लगा मन में एक प्रसन्नता हुई उन्होंने बाहर बैठे व्यक्ति से पूछा कि – “मैं भी कुछ दान करना चाहती हूँ, कहाँ रख सकती हूँ? पास बैठे व्यक्ति ने कहा कि “आप अंदर जाइए वहां पर एक बुजुर्ग दंपति बैठे हैं वह आपको सब बता देंगे।”
उसे सामने रिसेप्शन में बैठे सीनियर सिटीजन नजर आए ।
देखकर आशा ने कहा- “मैं कुछ किताबें यहाँ पर दान करने के लिए लाई हूँ लेकिन मैं क्या कुछ सामान भी लाकर यहाँ रख सकती हूँ?”
बुजुर्ग दंपति ने कहा- “बिल्कुल बहन आप यहाँ पर आकर पढ़ सकती हैं और सामान को दान दे सकते हैं।”
आशा जी ने कहा- “यहाँ पर मैं बैठकर अपने लेखन कार्य को अच्छे से कर सकती हूँ।”
आज मैंने एक बात समझी -“आप रचनाकारों को लिखने के लिए प्रेरित करने का नेक कार्य भी कर सकती हैं।”
वृद्ध महिला ने कहा- “महिलाऍं बहुत संघर्ष से लेखन कार्य करती है इसलिए हम उन्हें आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करते हैं। हमारे लाइब्रेरी में कोई भी आ सकता है।”
आशा जी ने कहा – “अधिकार की बात सब करते हैं किन्तु, आपने एक मिसाल कायम की है। अपने कर्तव्य का समाज के प्रति निर्वाह किया है।”
बुजुर्ग दंपति और आशा जी दोनों मुस्कुराने लगते हैं आशा जी की ऑंखों में एक नई ऊर्जा और चमक आ जाती है।
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




