श्री हेमंत तारे 

श्री हेमन्त तारे जी भारतीय स्टेट बैंक से वर्ष 2014 में सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्ति उपरान्त अपने उर्दू भाषा से प्रेम को जी रहे हैं। विगत 10 वर्षों से उर्दू अदब की ख़िदमत आपका प्रिय शग़ल है। यदा- कदा हिन्दी भाषा की अतुकांत कविता के माध्यम से भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त किया करते हैं। “जो सीखा अब तक,  चंद कविताएं चंद अशआर”  शीर्षक से आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका है। आज प्रस्तुत है आपकी एक कविता – लौट आया है वसंत।)

✍ लौट आया है वसंत… ☆ श्री हेमंत तारे  

सुनी है,

एक साल बाद

फागुन की पदचाप,

गुम हुआ जाड़ा,

कुछ कुछ तपने लगे दिन,

एक साल बाद,

लौट आया है वसंत l

 

यहां वहां ठाडे

युवा – बूढे

सभी पेड़ों को

कर गया था नंगा

निर्लज्ज पतझड़

और

खड़े थे नंगे

यूँ ही

ये पेड़

बाट जोहते

वसंत की I

 

अब  फूट पड़ेगी

कोपलें नयी

आयेंगे पात नये

घुल रहीं मादकता

यहाँ – वहाँ,

चहुंओर

कि

लौट आया है वसंत

एक साल बाद।

 

घर से दूर,

जहाँ शुरू होती है

कच्ची – पक्की, पगडंडियाँ

वहाँ खिल रहे हैं

पलाश

चटख

लाल पीले फूल ओढ़े

यहाँ – वहाँ, चहुंओर

कि

लौट आया है वसंत

एक साल बाद।

© श्री हेमंत तारे

मो.  8989792935

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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जगत सिंह बिष्ट
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