(प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक साहित्य ”  में हम श्री विवेक जी की चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल  (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी , जबलपुर ) से सेवानिवृत्त हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। आपको वैचारिक व सामाजिक लेखन हेतु अनेक पुरस्कारो से सम्मानित किया जा चुका है।आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय लघुकथा लंदन से 5 – सेव पेपर सेव ट्री

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # 269 ☆

? लघुकथा – लंदन से 5 –  सेव पेपर सेव ट्री ?

सार्वजनिक मुद्दो को जनहित याचिकाओ के माध्यम से उठाने के लिए वकील साहब की बड़ी पहचान थी। बच्चों के एजुकेशन को लेकर चलाई गई उनकी पिटिशन को विश्व स्तर पर यूनेस्को ने भी रिकगनाईज किया था।

उस दिन एक मंहगे रेस्त्रां में काफी पीते हुए उन्होंने देखा कि रेस्त्रां ने अपना मीनू कागज की जगह मोबाइल से स्कैन के जरिए प्रस्तुत कर सेव पेपर की मुहिम प्रमोट की थी। इससे वकील साहब बहुत प्रभावित हुए। उन का ध्यान गया कि ई पेपर के इस नए जमाने में भी ढेर सारे अखबार प्रिंट हो रहे हैं, स्कूलों में बच्चों को कापी पर ढेर सा होम वर्क करना होता है, चुनावों में बेहिसाब पोस्टर छापे जाते हैं, पेपर प्लेट्स में खाद्य पदार्थ दिए जाने भी कागज वेस्ट होता है, प्रचार में हैंड बिल्स में कागज की बेहिसाब बरबादी उन्हें दिखी। वकील साहब को समझ आया कि थोड़े से कागज की बचत का मतलब एक वृक्ष की जिंदगी बचाना है।

वकील साहब ने सेव पेपर की पी आई एल लगाने का मन बना लिया। उसी रात उन्होंने गहन अध्ययन कर एक तार्किक ड्राफ्ट तैयार किया, जिसमें उन्होंने मांग रखी कि यह अनिवार्य किया जाए कि न्यूज पेपर्स प्रकाशक महीने के अंत में अपने ग्राहकों से पुराने रद्दी अखबार वापिस खरीदें और रिसाइकिल हेतु भेजें। अखबार छापने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत रिसाइकिल पेपर ही प्रयुक्त किया जावे।

सुबह सेव पेपर सेव ट्री की अपनी यह जन हित याचिका लेकर वे कोर्ट पहुंचे। उनके बड़े कांटेक्ट सर्किल में उनकी इस नई पी आई एल को हाथों हाथ लिया गया। और उसी शाम क्लब में उनकी एक प्रेस वार्ता रखी गई। पत्रकारों को पी आई एल की जानकारी देने के लिए वकील साहब के स्टाफ ने एक बड़ी विज्ञप्ति प्रिंट की। एन समय पर वकील साहब की दृष्टि पड़ी की विज्ञप्ति में उन्हें प्राप्त सम्मानों में हाल ही मिले कुछ अवार्ड छूट गए हैं। उन्होंने स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई, आनन फानन में विज्ञप्ति के नए सविस्तृत प्रिंट फिर से निकाले गए, प्रेस वार्ता बहुत सक्सेसफुल रही, क्योंकि दूसरे दिन हर अखबार के सिटी पेज पर उनकी फोटो सहित चर्चा थी। उनके पर्सनल स्टाफ ने अखबार की कटिंग की फाइल बनाते हुए देखा कि कल शाम की रिजेक्टेड विज्ञप्ति के पन्ने फड़फड़ा रहे थे और उनसे रद्दी की टोकरी भरी हुई थी, जिसे जलाने के लिए आफिस बाय बाहर ले जा रहा था।

* * * *

© विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ 

म प्र साहित्य अकादमी से सम्मानित वरिष्ठ व्यंग्यकार

इन दिनों, क्रिसेंट, रिक्समेनवर्थ, लंदन

संपर्क – ए 233, ओल्ड मिनाल रेजीडेंसी भोपाल 462023

मोब 7000375798, ईमेल apniabhivyakti@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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