श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता पूजनीय वृक्ष।)

☆ शशि साहित्य # ९ ☆

? कविता – परम सत्य…  ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

उसको आना है, वो आएगी जरूर..

ना करेगी इंतजार, किसी स्नेह आमंत्रण का..

जब तय है आना, तो राह पर टकटकी कैसी..

सारी जद्दोजहद तो, जिंदगी के लिए

हंस के और हंसा के गुजरे,

तो सोने पर सुहागा है..

ना नाप पैमाने को, कि खाली है वो आधा,

दम रखता है वह बेतहाशा हिलोरें भरने का,

गर पूरा भर गया, तो छलक कर बह जाएगा..

मानव जीवन पाया, मौका मिला, नर से नारायण हो जाने का..

सृजन की क्षमता दे, ईश्वर ने अपने समकक्ष कर दिया, ‍

फिर सोचना कैसा, योग्यता से अपनी, नारायणी बन जा ना..

 

ना करो जाया, समझो हर पल की कीमत को,

 सिर्फ ये ही है वो शै,

ना लौट कर आएगी दोबारा..

ईश्वर भी खुश हो, अपनी रचना देखकर,

याद रह जाओ, ऐसा कुछ “अच्छा” कर जाना,

जितनी भी मिली, जिंदा दिली से जी जाना..

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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