डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – नभ के नील वितान पर)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३०८ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – नभ के नील वितान पर ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

अम्बर नील वितान-सा, खुला मौन का द्वार।

सभी जगह है एक-सा, शून्य सृजे संसार।।

 *

 सूरज तपता आज तो, रचता दिन का राग ।

 जगह-जगह घूमे  फिरे, ओढ़ा स्वर्णिम भाग ।।

 *

धीरे-धीरे मेघ ने, ले ली अपनी राह ।

ओस बूँद की झलकियाँ, यही  धरा की चाह ।।

 *

नभ के नील वितान पर, सूर्य करे उद्घोष।

तम की सीमा है जहाँ, उजियारे का रोष ।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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