डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे  – हमराज)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३०९ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – हमराज ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

करके वादा थे गए, दिखे नहीं  सरताज।

बीत गया है दिन सकल, नैन थके  हैं आज।।

 *

दिल चुराया आपने, हे मेरे हमराज।

अब तो दिल दुखने लगा, अंतर्मन आवाज़।।

 *

लुटना तेरे प्यार में, जानम तेरे नाम।

अब क्यों आँखें चुरा रहे, होने को है शाम।।

 *

आपस में क्यों रूठना, बसती मुझमे जान।

उसको गले लगा लिया, छूटे मेरे प्राण।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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