श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # १९५ ☆

☆ मुक्तक ।। जिंदगी तेरा अभी कर्ज़ चुकाना बाकी है ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

=1=

जिंदगी अभी चल कि प्रभु का कर्ज चुकाना बाकी है।

किसी पराये का भी कुछ दर्द मिटाना बाकी है।।

रिश्तों की तुरपाई करनी है आपस में मिल कर।

ईश्वर के शुकराने में भी सिर झुकाना बाकी है।।

=2=

किसी के पेट की आग अभी बुझाना बाकी है।

नई-नई पीढ़ी को भी सही राह सुझाना बाकी है।।

बहुत काम कर लिया है जीवन भर इस सफर में।

फिर भी अभी कुछ नया करके दिखाना बाकी है।।

=3=

जीवन के मोड़ों की कई गाँठे अभी सुलझाना बाकी है।

हँसते – हँसते हुए भी अभी रूठना मनाना बाकी है।।

छूट गया पीछे जो जीवन की लंबी सी इस दौड़ में।

तिनका – तिनका जोड़ कर उस को जुटाना बाकी है।।

=4=

दिल कीअधूरी बात भी अभी सबको सुनाना बाकी है।

किसी रोते हुए को भी हमें अभी हँसाना बाकी है।।

जो मिली अनमोल वरदान सी यह एक ही जिंदगी।

उस जिंदगी का बाकी फ़र्ज़ अभी निभाना बाकी है।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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