डॉ राकेश ‘चक्र’
(हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. राकेश ‘चक्र’ जी की अब तक लगभग तेरह दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें ( बाल साहित्य व प्रौढ़ साहित्य ) तथा लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन।लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन। कई कृतियां पंजाबी, उड़िया, तेलुगु, अंग्रेजी आदि भाषाओँ में अनूदित । कई सम्मान/पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा बाल साहित्य के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य श्री सम्मान’ और उत्तर प्रदेश सरकार के हिंदी संस्थान द्वारा बाल साहित्य की दीर्घकालीन सेवाओं के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य भारती’ सम्मान, अमृत लाल नागर सम्मान, बाबू श्याम सुंदर दास सम्मान तथा उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संस्थान के सर्वोच्च सम्मान सुमित्रानंदन पंत, उत्तर प्रदेश रत्न सम्मान सहित बारह दर्जन से अधिक राजकीय प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं गैर साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित एवं पुरुस्कृत।
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आप “साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र” के माध्यम से उनका साहित्य प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र – # २८५ ☆
☆ गीत – तुझको स्वयं बदलना होगा… ☆ डॉ राकेश ‘चक्र’ ☆
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देख रहा घर – घर में रगड़े
तुझको स्वयं बदलना होगा।
जीवन की हर बाधाओं से
हँसते – हँसते लड़ना होगा।।
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कर्तव्यों से हीन मनुज जो
अधिकारों की लड़े लड़ाई।
प्रकृति के अनुकूल न चलता
आत्ममुग्ध हो करे बड़ाई।
झूठे सुख के लिए सदा ही
देख रहा ना पर्वत – खाई।
धन – संग्रह की होड़ लगी है
मन कपटी है चिपटी काई।
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हे मानव ! तू सँभल ले अब भी
तुझको स्वयं भुगतना होगा।
देख रहा घर – घर में रगड़े
तुझको स्वयं बदलना होगा।।
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जो सन्तोषी इस धरती पर
वह ही सुख का मूल्य समझता।
वैभवशाली, धनशाली का
सबका ही सिंहासन हिलता।
उद्यम कर, पर चैन न खोना
अपना लक्ष्य बनाकर चलना।
परहित – सा कोई धर्म नहीं है
देवदूत बन सबसे मिलना।
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समय कीमती व्यर्थ न खोना
तुझको स्वयं समझना होगा।
देख रहा घर – घर में रगड़े
तुझको स्वयं बदलना होगा।।
*
सामानों की भीड़ लगाकर
अपने घर को नरक बनाए।
सारा बोझा छूटे एक दिन
उल्टे – पुल्टे तरक चलाए।
उगते सूरज योग करें जो
उनकी किस्मत स्वयं बदलती।
कर्म और पुरुषार्थ, भलाई
यहाँ – वहाँ ये साथ हैं चलतीं।
*
परिस्थितियां जो भी हों साथी
तुझको स्वयं ही ढलना होगा।
देख रहा घर – घर में रगड़े
तुझको स्वयं बदलना होगा।।
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© डॉ राकेश चक्र
(एमडी,एक्यूप्रेशर एवं योग विशेषज्ञ)
90 बी, शिवपुरी, मुरादाबाद 244001 उ.प्र. मो. 9456201857
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





