श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # १९६ ☆

☆ गीत ।। अपनो से जंग जीत कर भी आप हार जाते हैं ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

अपनो से जंग जीत कर भी आप हार जाते हैं।

उनके दिल में फिर आप जगह पा नहीं पाते हैं।।

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जीवन में यह एक तरीका जरूर आजमाना चाहिए।

अगर हो बहस अपनो से तो  हार  जाना   चाहिए।।

अपनो से हार कर भी आप उनका दिल जीत लाते हैं।

अपनो से जंग जीत कर भी आप हार जाते हैं।।

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रिश्ते बनाना आसान लेकिन निभाना कठिन होता है।

बिनअहसास भावना के रिश्ता कहीं और ही खोता है।।

अपनापन और विश्वास मिल कर सच्चे रिश्ते बनाते हैं।

अपनो से जंग जीत कर भी आप हार जाते हैं।।

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वही सच्ची दोस्ती जहां दिल  का तार जुड़ा होता है।

अहंकार शून्यऔर न ही वहां कोई छोटा-बड़ा होता है।।

कुछ लोग दिल में उतरते तो कुछ दिल से उतर जाते हैं।

अपनो से जंग जीत कर भी आप हार जाते हैं।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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