सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता हरी भरी वसुंधरा!!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # १२ ☆
☆ हरी भरी वसुंधरा!! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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हमें भली सदा लगे हरी भरी वसुंधरा ।
करे सभी प्रयास ये सुखे नहीं कभी जरा ।।
मृदा बहाव रोकते तने खड़े यहाँ घने ।
बचा रहे जहान को समान देवता बने ।।
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कटाव वृक्ष का थमे नवीन संपदा बने ।
उमंग में रहे समाज पर्व ये नया मने ।।
लगे मुझे समान नार वृक्ष भी यहांँ कदा ।
करे महान कार्य देख दर्द भी सहे सदा ।।
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सदैव नेह डोर बाँधती हरेक भावना ।
सजा रही जहान को मिले भले प्रताड़ना ।।
विडम्बना मिटे सभी करो प्रयास ये जरा ।
प्रसन्न नार वृक्ष हो हरी भरी वसुंधरा ।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





