श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “कह रहे है सब ग़ज़ल“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३९ ☆

✍ कह रहे है सब ग़ज़ल… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

हम तने-तन्हा चले थे आसरा कोई न था

राह थी दुश्वार मंज़िल का पता कोई न था

हो गए है हम ज़ुदा मर्ज़ी ये रब की मानकर

बेवफ़ा कोई नहीं था बावफ़ा कोई न था

 *

है नहीं बेटी सुरक्षित कोख में या जन्म ले

मर्द हक़ में  बोलने आगे बढ़ा कोई न था

 *

कौन गुलशन की फ़ज़ा में  ज़हर इतना भर गया

नफ़रतें ही नफ़रतें थी दूसरा कोई न था

 *

साथ चलती भीड़ से तुम मुतमइन क्यों हो रहे

सब किराए के है टट्टू काम का कोई न था

 *

तुमसे मिलने में रिवायत की खड़ी दीवार जब

सबसे की मैंने बगावत रास्ता कोई था

 *

कह रहे है सब ग़ज़ल उस्ताद खुद को मानकर

हो नहीं तनक़ीद अब और तब्सिरा कोई न था

 *

आज भी इंसानियत ज़िंदा अरुण संसार में

खून जो मुझको दिया था राब्ता कोई न था

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

सिरThanks मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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