श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – कौन अपना?।)
☆ लघुकथा # ११९ – कौन अपना? ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
श्मशान की लपटें शांत हो चुकी थीं। माँ की सूनी आँखें अब भी बेटी की चिता की राख को निहार रही थीं। जिस बेटी को उसने नौ महीने कोख में रखा, उँगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी को आज अपने हाथों विदा करना पड़ा।
सबसे अधिक पीड़ा बेटी की मृत्यु की नहीं, बल्कि उन रिश्तों की थी जो उसके साथ ही मर गए। जीते-जी जिसे घर की लक्ष्मी कहा गया, उसके अंतिम सफ़र में वही लोग साथ छोड़ गए।
पास खड़ी एक वृद्धा की भर्राई आवाज़ गूँजी—
“हे ईश्वर! यदि संतान ऐसी हो, जो अपने ही रिश्तों का धर्म भूल जाए, तो निःसंतान रहना ही कहीं अधिक अच्छा है।”
चिता की राख हवा में उड़ रही थी और उसके साथ समाज के खोखले रिश्तों का सच भी।
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






