आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  आचार्य जी का एक  गीत – आज के इस दौर में भी। )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 23 ☆ 

☆ गीत – आज के इस दौर में भी ☆ 

आज के इस दौर में भी समर्पण अध्याय हम

साधना संजीव होती किस तरह पर्याय हम

 

मन सतत बहता रहा है नर्मदा के घाट पर

तन तुम्हें तहता रहा है श्वास की हर बाट पर

जब भरी निश्वास; साहस शांति आशा ने दिया

सदा करता राज बहादुर; हुए सदुपाय हम

 

आपदा पहली नहीं कोविद; अनेकों झेलकर

लिखी मन्वन्तर कथाएँ अगिन लड़-भिड़ मेलकर

साक्ष्य तुहिना-कण कहें हर कली झरकर फिर खिले

हौसला धरकर; मुसीबत हर मिटाने धाय हम

 

ओम पुष्पा व्योम में, हनुमान सूरज की किरण

वरण कर को विद यहाँ? खोजें करें भारत भ्रमण

सूर सुषमा कृष्ण मोहन की सके बिन नयन लख

खिल गया राजीव पूनम में विनत मुस्काय हम

 

महामारी पूजते हम तुम्हें; माता शीतला

मिटा निर्बल मंदमति, मेटो मलिनता बन बला

श्लोक दुर्गा शती, चौपाई लिए मानस मुदित

काय को रोना?, न कोरोना हुए निरुपाय हम

 

गीत गूँजेंगे मिलन के, सृजन के निश-दिन सुनो

जहाँ थे हम बहुत आगे बढ़ेंगे, तुम सिर धुनो

बुनो सपने मीत मिल, अरि शीघ्र माटी में मिलो

सात पग धर, सात जन्मों संग पा हर्षाय हम

 

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

२९-४-२०२०

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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