श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘पूजनीय वृक्ष…‘।)
कविता – पूजनीय वृक्ष… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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ईश् पर ही खिला था पुष्प,
मंदिर जा, शीश पर चढ़ा दिया,
नगण्य हुआ सौंदर्य भी,
जीवन भी कमतर हुआ,
एक बूंद अश्रु की,
पाषाण से, नीचे को ढलक गई,
भावना तो दिखी नहीं,
सुंदर रचना भी मिट गई,
… स्वत: ही बीज बनकर,
नव अंकुर को पोषता,,
उफ़!! यह सारी संभावना,,
सिरे से खत्म हो गई…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





