श्री एस के कपूर “श्री हंस”

☆ “श्री हंस” साहित्य # २११ ☆

☆ गीत ।। मैं से हम की यात्रा सब कुछ बदल देती है ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

मैं से हम   की यात्रा   सब कुछ बदल देती है।

सामूहिक शक्ति ही  अतुलनीय बल असल देती है।।

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मिलकर सहयोग की ताकत कहीं अधिक होती है।

कार्य सम्पूर्ण होताऔर बात अहम में नहीं खोती है।।

मैं की नीति अधिकतर कार्य को राह रसातल देती है।

मैं से हम  की यात्रा सब   कुछ बदल देती है।।

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ऊँचीआवाज नहीं शब्दों में वजन की बात होनी चाहिए।

तार्किक दृष्टि की इसमें भरपूर सौगात होनी चाहिए।।

सहयोग सरोकार की बात हर समस्या का हल देती है।

मैं से हम  की यात्रा   सब कुछ बदल  देती है।।

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मानवताआज तरस रही एक दूजे का प्यार पाने के लिए।

हर एक कोशिश होनी चाहिएअहम दूर भगाने के लिए।।

मिलकर काम करने की भावना ही सुनहरा कल देती है।

मैं से हम की  यात्रा सब   कुछ  बदल देती है।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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