सुश्री मंजिरी “निधि”
(बड़ोदा से सुश्री मंजिरी “निधि” जी की गद्य एवं छंद विधा में विशेष अभिरुचि है और वे साथ ही एक सफल महिला उद्यमी भी हैं।
आज प्रस्तुत है आपका आलेख ‘समृद्ध संस्कृति की अद्भुत भूमि – ५‘।)
☆ मंजिरी साहित्य # २० ☆
कविता – आलेख – समृद्ध संस्कृति की अद्भुत भूमि – ५ ☆ सुश्री मंजिरी “निधि”
26 जनवरी 2001 जब सम्पूर्ण भारत अपना राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस मना रहा था तभी सुबह के 8.46 मिनट पर कच्छ की भूमी में कंपन हुआl कंपन भी सामान्य नहीं अपितु अति भयंकरl जिसे देश ने सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा का नाम दे दियाl देखते ही देखते यहाँ के घर मलबों में परिवर्तित हो गयेl मलबों में लाखों लोग दब गयेl जहाँ कुछ बच्चों ने अपने माता -पिता को खो दिया वहीं कुछ पालकों ने अपनी आखों के सामने अपने लाड़लो को काल के मुँह में समाते देखाl देखते ही देखते लोग बेघर हो गयेl इतनी संख्या में मृत जन थे कि जलाने के लिये लकड़ियाँ भी कम पड़ गई थींl
जैसे ही ये समाचार सामने आया तब भारत की सरकारी, प्राइवेट, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय जैसे संगठन एकजुट होकर मदद करने हेतु सामने आये l इन सभी ने निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, भोजन, कपड़े और रहने हेतु टेंट देने शुरु कियेl
आश्चर्य ये था कि यहां के भुंगे मकानों को कुछ भी नहीं हुआl क्यूंकि ये भुंगे गोलाकार होते हैं जिससे भूकंप का इसके किसी एक कोने की दीवार पर दबाव नहीं पड़ताl हवा का दबाव इन्हें क्षति नहीं पहुँचाताl इनमे लगी ईटे मिट्टी, गोबर और घास फूस से बनी होती हैं l छत शंकु आकार की लकड़ी के खम्भों से बनी होती है तो हल्की हो जाती है जिससे भीतों पर वजन नहीं पड़ताl
इस भूकंप ने कच्छ को झिंझोड़कर कर रख दियाl पर ये अद्भुत शक्ति के लोग कहाँ हार मानने वाले थेl इन सभी ने पुनः मिलकर कच्छ के नवीनीकरण की शपथ ग्रहण लीl आज खावड़ा में सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा हाइब्रिड रीयूजेबल एनर्जी पार्क बनाया जा रहा हैl
इसी समय भारत सरकार ने तुरंत ही मुंद्रा पोर्ट को भारतीय रेल से जोड़ना शुरु कर दिया l सरकार ने यहां उद्योगों में करों में भारी छूट दे दीl इस पोर्ट को कार्गो हेतु पुरी तरह ऑटोमेटीक किया जिससे कम समय में ज्यादा सामान उतरने और चढ़ने लगा l देश की बड़ी कंपनियों ने यहां थर्मल पॉवर प्लांट लगाये जिससे विद्युत उत्पत्ति बढ़ गईl देखते ही देखते यह पोर्ट देश के कंटेंनर का करीब करीब 60% व्यापार देखने लगाl पोर्ट के विकास होने से लेबर से लेकर इंजीनियर को हर तरह का रोजगार मिलाl
वहीं कंडला पोर्ट जिसे हम दीनदयाल नाम से भी जानते है, ये पोर्ट हमारे देश के साथ एशिया का सबसे बड़ा सरकारी पोर्ट बन गयाl यह पोर्ट भी देश के सभी राज्यों से जुडा हुआ हैl ये पोर्ट मुख्य रूप से देश की बड़ी रिफाइनरी को कच्चा तेल सप्लाई करता हैl यह लिक्विड कार्गो पोर्ट की तरह काम करता हैl
आज ये दोनों पोर्ट फोर ट्रैक सड़क से जुड़ गये हैं l
दुनिया का कोई एसा देश नहीं जहाँ कच्छीयों ने अपना अधिपत्य न जमाया हो l ये कच्छी अति परिश्रमी, कभी ना हार मानने वाले, किसी भी परिस्थिति में कामयाबी पाने वाले होते हैंl
हैं ना अद्भुत भूमि अद्भुत लोग?
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© सुश्री मंजिरी “निधि”
बड़ोदा, गुजरात
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




