श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “मामा का घर।)

?अभी अभी # १०७९  ⇒ आलेख – मामा का घर ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

समय बदलते देर नहीं लगती !

जो कभी नानी का घर था, समय के साथ मामा का घर हो गया। समय ने मामा को भी गाँव से शहर भेज दिया। अब जहाँ मामा, वहाँ मामा का घर।

माँ और मामा का भाई-बहन का रिश्ता रहता था। साल में केवल एक त्योहार, जो माँ और मामा को एक सूत्र में बाँधता था – राखी !

मेरी माँ, पाँच भाईयों में इकलौती बहन थी। कभी राखी पर किसी मामा के घर नहीं गई। लेकिन राखी हर साल, हर हाल में, भाइयों की कलाई तक पहुँच जाती थी।।

वह फ़ोन और मोबाइल का युग नहीं था ! लिफ़ाफ़े में ही राखी भेजी जाती थी। और साथ में जाता था, दो लाइन का पत्र, जो हर वर्ष मुझे ही लिखना पड़ता था। मैं चिढ़ता, नाराज़ होता, भाईयों को तुम्हारी चिंता नहीं, और तुम फिर भी हर साल !

दो लाइन की चिट्ठी का मजमून, अमूनन, यही रहता था। पूज्य भाई साहब !सादर प्रणाम। आप स्वस्थ होंगे। राखी भिजवा रही हूँ। बंधवा लें। भाभीजी को प्रणाम। आपकी बहिन।

आज माँ नहीं है ! पाँच मामाओं में से एक भी मौजूद नहीं है। जहाँ आज भी बहन नहीं पहुँच पाती, राखी ज़रूर पहुँच जाती है। फ़ोन पर बातचीत हो जाती है।

व्हाट्सएप्प के जरिए फोटोज की भी आवाजाही चला करती है। पीढियां बदल गईं। रिश्ते नहीं बदले !।।

आज भी नानियाँ हैं, बच्चे हैं, नानी का घर है। हां ! नानी की कहानियाँ ज़रूर बदल गई हैं ! आज की नानियाँ बच्चों को होमवर्क करवाती हैं, स्टॉप तक स्कूल छोड़ने जाती हैं। सब साथ-साथ पीवीआर में फ़िल्म देखने जाते हैं। हां, टिकट आज भी मामा ही लाते हैं।

रिश्ते हैं तो प्यार है। प्यार है तो त्योहार है। हमें आज के दिन इन प्यार के बंधनों की ही रक्षा करना है। रिश्ते जहाँ परवाह है, सम्मान है, एक दूसरे के लिए दिलों में प्यार भरा आग्रह है, स्नेहयुक्त अनुरोध है। हर घर में एक नानी-नाना हो, मामा हो, दादा-दादी, चाचा-चाची, भाई-बहन हो। संस्कार हो, तो कहाँ से समाज में राग-द्वेष हो, विसंगति हो, विपरीत बुद्धि हो। हम आगे बढें, लेकिन अतीत की सुखद छाँव, वर्तमान को सहेजती, दुलारती, निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर करती रहे।

सभी को रक्षाबंधन पर्व की शुभकामना।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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