श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा –  गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी,  संस्मरण,  आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – आधुनिक ए आई तकनीक और मानवीय संवेदना।)

☆ लघुकथा # १०३ – आधुनिक ए आई तकनीक और मानवीय संवेदना श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

कमला  अपनी कहानी के रजिस्टर को लेकर पास के साइबर कैफे में गई ।

साइबर कैफे का मालिक उसके बेटे उज्जवल  का परम मित्र था।

उज्जवल तो विदेश में नौकरी करने चला गया। अपनी वृद्ध माँ को अकेला छोड़कर।

कमला जी विदेश जाना भी नहीं चाहती थी?

अकेले घर में खाली बैठे हुए बागवानी करती थी और कहानी लिखती थी, अपने जीवन के उतार-चढ़ाव की।

मन में एक विचार आया कि चलो अमन से बात करते हैं।

कमल जी तैयार होकर तुरंत अमर के कैफे में पहुंची।

कमल जी को देखकर अमन ने कहा- “नमस्ते आंटी आप थोड़ी देर बैठ जाइए मैं कुछ फोटो को एडिट कर रहा हूं। बस थोड़ी देर में ही काम खत्म हो जाएगा, फिर आपकी बात सुनता हूँ।”

 वे किनारे रखी कुर्सी में बैठ गई उनके बगल में एक 15 साल की लड़की नेट पर कुछ मैटर  सर्च करवा रही उन्होंने देखा प्रसिद्ध हिंदी के रचनाकारों की पिक्चर थी, इसलिए उनकी जिज्ञासा बढ़ी। उन्होंने पूछा बिटिया “हिंदी के इन कलम के सिपाहियों के बारे में  क्या जानती हो?”

“नहीं आंटी पर मैं इनके बारे में नहीं जाना चाहती स्कूल में मुझे फेमस राइटर के बारे में प्रोजेक्ट बनाने को दिया है।”

कमल जी ने कहा -“बेटा यदि तुम जानना चाहो तो मेरे पास किताबें हैं तुम लेकर प्रोजेक्ट बना सकती हो।”

“हम इंटरनेट यूजर हैं, हमें दिमाग लगाने की कोई जरूरत नहीं है।”

आंटी मेरा नाम खुशी है आप मुझे बिटिया न कहें, मैडम ने कहा है, प्रोजेक्ट बनाना है अंकल सभी की फोटो निकालकर बढ़िया सा एक प्रोजेक्ट मुझे बनाकर 1 घंटे में दे देंगे।

 इधर-उधर भटकने की और मेहनत करने की मुझे क्या जरूरत है?

कमल जी की ओर देखकर उस लड़की ने बोला -“जाने कहाँ-कहाँ से आ जाते हैं सलाह देने के लिए?”

कमल जी को बहुत दु:ख हुआ क्योंकि वे सब उनके पसंदीदा  लेखक थे वे क्या करती इसीलिए चुप हो गई।

लड़की खुशी ने कहा-  अमन अंकल मेरी फोटो तो आपने सब एडिट कर दिए अब एक लेख के साथ अच्छा सा प्रोजेक्ट बना दीजिएगा, वीडियो भी  बना दीजिएगा बिल्कुल ऐसा लगे मैं ही बोल रही हूँ। 2 घंटे बाद में आकर ले जाऊंगी एक पेन ड्राइव में सब कर दीजिएगा, पैसे आपको पूरे मिल जाएंगे।

अमन ने कहा -“चार हजार में बढ़िया बन जाएगा।”

उस लड़की ने कहा – ठीक है और गाड़ी स्टार्ट करके चली गई।

कमल जी ने कहा – “अमन बेटा आजकल बच्चे पढ़ाई-लिखाई कुछ नहीं करते तुम्हारे पास आते रहते हैं इसीलिए इतनी भीड़ है।”

अमन बोल – “हां आंटी आजकल सभी बच्चों के हाथ में मोबाइल है, इंटरनेट भी है सारे सवालों के जवाब पूछते हैं।”

कमल जी ने कहा- ” बेटा फिर इन बच्चों का दिमाग कैसे चलेगा जब किताब पढ़ कर प्रोजेक्ट नहीं करेंगे  तो?”

अमन ने कहा – “अरे! आंटी आजकल सारे बच्चे बदल गए हैं, छोटे-छोटे बच्चे भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का उपयोग करते हैं।”

“ठीक कह रहे हो अमन” – कमल जी ने गंभीर स्वर में कहा।

कमला जी की आंखों में आंसू आ गए रोते हुए उन्होंने कहा-

“आजकल किसी के अंदर कोई भावना और इमोशन नहीं है, रिश्ते भी बदल गए हैं।”

“हाथ में एक छोटा सा जादू पकड़ लिया है मोबाइल नामक राक्षस।”

सारा कुछ इसी में देखते हैं, आजकल लोग एकाकी हो गए हैं, इसी के जरिए लोगों को उल्लू बनाकर पैसे भी मांगते हैं, कुछ दिन पहले बेटा डिजिटल क्राइम के विषय में सुना था।

क्या कोई इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इलाज नहीं करता?

अमन ने कहा -“आंटी अभी तो दुनिया इसी पर चल रही है, जाने कितने युवाओं की नौकरी भी जा रही है भविष्य में देखते हैं क्या होगा?”

कमला जी ने कहा – “बेटा अमन तुम तकनीकी के काम करते हो और हम बुजुर्गों की बात तो सुन लेते हो। भगवान इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जादू से हम सबको बचाए मैं ऐसी प्रार्थना करूंगी।”

© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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