श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – छत और छाता।)
☆ लघुकथा # १२८ – छत और छाता ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
सुबह से लगातार बारिश हो रही थी। दोपहर तक सड़कें पानी से भर गईं। बाजार की अधिकांश दुकानें बंद थीं, फिर भी शांति सड़क किनारे सब्जियों की टोकरी लिए बैठी थी।
कमल जी ने उसे देखा तो रुक गए।
“शांति, तुम अभी तक यहीं बैठी हो?
इतनी तेज बारिश में भी?”
शांति मुस्कुराई, “क्या करूँ बाबूजी, बारिश देखकर पेट थोड़ी न रुकता है।”
“घर चली जाओ। आज कौन सब्जी खरीदने आएगा?”
“शायद कोई न आए।”
“फिर यहाँ बैठने का क्या फायदा?”
शांति ने कुछ क्षण उनकी ओर देखा, “फायदा नहीं है बाबूजी, जरूरत है।”
“ऐसी भी क्या जरूरत?”
“आज की कमाई नहीं हुई तो आज रात चूल्हा नहीं जलेगा।”
कमल जी चुप हो गए। फिर बोले, “तुम्हारे घर में और कोई कमाने वाला नहीं है?”
“पहले पति थे। अब बीमारी ने उन्हें बिस्तर दे दिया है। घर चलाने की जिम्मेदारी मेरे हिस्से में आ गई।”
“और बच्चे?”
“दो हैं। दोनों पढ़ते हैं।”
“इतनी मुश्किल में पढ़ा रही हो?”
शांति की आँखों में चमक आ गई।
“हाँ बाबूजी। मैं चाहती हूँ कि मेरे बच्चे मेरी तरह बारिश देखकर अपना काम न रोकें। बड़ा कहता है—‘अम्मा, मैं बड़ा होकर ऐसा घर बनाऊँगा, जिसकी दीवारों से पानी नहीं टपकेगा।’”
कमल जी ने उसकी ओर देखा।
“तुम्हारी अपनी इच्छा क्या है, शांति?”
वह हँसी, फिर बोली, “मेरी? बस इतनी कि एक दिन बच्चों के साथ बैठकर चैन से खाना खा सकूँ और ऊपर देखकर यह न सोचूँ कि अगली बूंद थाली में गिरेगी या सिर पर।”
कमल जी ने उसकी सारी सब्जियाँ खरीद लीं।
“अब घर जाओ।”
शांति ने पैसे सँभाले और चल पड़ी।
कुछ दूर जाकर कमल जी की नजर सरकारी होर्डिंग पर पड़ी -“हर बच्चे को शिक्षा, हर परिवार को सुरक्षित आवास।”
उसी क्षण शांति का बच्चा किताबें बचाते हुए दौड़ता दिखाई दिया।
कमल जी ने ऊपर देखा—होर्डिंग सुरक्षित थी, नीचे एक छात्र भीग रहा था।
शांति के हाथ में टूटा हुआ छाता था, उसके घर की छत फिर टपक रही थी।
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





