ई-अभिव्यक्ति -गांधी स्मृति विशेषांक-2
श्री रमेश सैनी
(प्रस्तुत है सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार श्री रमेश सैनी जी की महात्मा गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मदिवस पर एक कविता. श्री रमेश सैनी जी व्यंग्य विधा के सशक्त हस्ताक्षर हैं. )
☆ प्रश्नचिन्ह ☆
हम हर वर्ष
मनाते हैं, जयंती
गाँधी और नेहरू की
खाते है,कसम
पदचिंहों पर चलने की
कसम वही रेखा है,
रेत पर खींची हुई
जिन्हें हर वर्ष
हम पीटते हैं
भूल गए हम उन्हें
उनके स्मारक बनाकर
चढ़ा देते हैं, पुष्प
वर्ष में एक बार जाकर
क्या ?
वतन पर मरने वालों का यही बाँकी निशां होगा ?
रमेश सैनी
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सत्य वचन