डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “दिन में तारे“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # १९ ?

? कविता – दिन में तारे… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

=1=

चाँद समझकर लाया जिसको, वो दिन में तारे दिखलाये

शीतल झील सी थीं जो आँखें, अब वो अंगारे बरसाये

=2=

तू-तू मैं-मैं खिट-पिट ताने, जब देखो लड़ने की ठाने

नख़रे एटीट्यूड खौफ़ से, मायके की नित धौंस दिखाए

=3=

फ़रमाइश उसकी बहुतेरी, शब्द-बाण उफ़ ज्यों रण-भेरी

ब्याह का लड्डू यारा हमने, खाये और बहुत पछताए

=4=

जो थी पहले आज्ञाकारी, नारी वही अब मुझ पर भारी

इस बेलनधारी की दहशत, से मुझको कोई बेल दिलाये

=5=

शाम को जाऊँ भटका-भूला, मिले सदा मुँह उसका फूला

फ़ौरन यह फ़रमान कि तुमने, धनिया-मिर्ची क्यों न लाए

=6=

सुकूँ भरी अब रैन नहीं है, घर-दफ़्तर में चैन नहीं है

मार्केट मॉल सिनेमा शॉपिंग, चलूँ संग थैला लटकाए

=7=

एक तो अपनी तनख़ा छोटी, ऊपर से ये इतनी मोटी

बोझ तले ‘राजेश’ बेचारा, दिन-ब-दिन क्यों न मुरझाये??

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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