डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – – बसंत )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३०७ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – बसंत ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

माघ माह की पंचमी, ऋतु  है बसंत राज।

घर घर में सब पूजते, मां सरस्वती आज।।

जन्म -जन्म बुझती नहीं, तेरी मेरी प्यास। 

दिखता मुझे बसंत है, बरसे है मधुमास।।

 *

बीत गया पतझड़ अभी, छाने लगा बसंत।

अच्छे दिन अब आ गए, हुआ शीत का अंत।।

 *

डाल डाल पर झूमता, प्यारा लगे बसंत।

महक महक रसधार का, कभी न होवे अंत।

 *

 मादकता बौरा गई, देख  बसंती रूप।

मधुबन भी खुश हो रहा, मौसम के अनुरूप।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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