आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – पूर्णिका – नेह नर्मदा)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २६४ ☆

☆ नर्मदा जयन्ती विशेष – पूर्णिका – नेह नर्मदा ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

रमा चंचला, मन चंचल

रमे रमा में हो अविचल

.

नेह नर्मदा रुद्ध न हो

रहे प्रवाहित कलकल कल

.

बुद्धि रही भरमाती क्यों

भेद-बुद्धि है मिथ्या छल

.

उगना है सूरज सम तो

हँसते-हँसते संझा ढल

.

नहीं समस्या है ऐसी

जिसका कोई मिले न हल

.

परख साधु की होती तब

जब टकराता कोई खल

.

मोबाइल रख पॉकेट में

आपस में करिए मिल गौल

.

मंजिल कितनी दूर न सोच

पग चूमेगी चलता चल

.

देख अन्य की प्रगति न जल

तम हरने दीपक बन जल

.

दमयंती हो हर नारी

नर हो पाए राजा नल

.

कट जाते हैं युग पल में

युग बन कटता ‘सलिल’ न पल

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

१३.१.२०२६

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

 संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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