स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है, आपके काव्य संग्रह ‘शब्द नहीं रहे शब्द‘ की एक भावप्रवण कविता – अर्थहीन संख्याएँ…।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २६९ – अर्थहीन संख्याएँ
(काव्य संग्रह – शब्द नहीं रहे शब्द से )
2 मरे 10 घायल
10 मरे 100 घायल
100 मरे 1000 घायल
बस यूँ ही बढ़ती जायेगी
शून्यों की संख्या बनते जायेंगे आँकड़े
और छपते रहेंगे अखबारों में।
पढ़ते रहें लोग
बिना किसी उत्तेजना के।
होता है
ऐसा होता है तब
जब आदमी संख्या में बदल जाता है,
भला, आदमी और संख्या का नाता है?
हम सब संख्यातीत
अब बन कर रह गये हैं
अर्थहीन संख्याएँ।
© डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
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