डॉ राकेश ‘चक्र

(हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. राकेश ‘चक्र’ जी  की अब तक लगभग तेरह दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें ( बाल साहित्य व प्रौढ़ साहित्य ) तथा लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन।लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन। कई कृतियां पंजाबी, उड़िया, तेलुगु, अंग्रेजी आदि भाषाओँ में अनूदित । कई सम्मान/पुरस्कारों  से  सम्मानित/अलंकृत।  भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा बाल साहित्य के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य श्री सम्मान’ और उत्तर प्रदेश सरकार के हिंदी संस्थान द्वारा बाल साहित्य की दीर्घकालीन सेवाओं के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य भारती’ सम्मान, अमृत लाल नागर सम्मानबाबू श्याम सुंदर दास सम्मान तथा उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संस्थान  के सर्वोच्च सम्मान सुमित्रानंदन पंतउत्तर प्रदेश रत्न सम्मान सहित बारह दर्जन से अधिक राजकीय प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं गैर साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित एवं पुरुस्कृत। 

आदरणीय डॉ राकेश चक्र जी के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें 👉 संक्षिप्त परिचय – डॉ. राकेश ‘चक्र’ जी।

आप  “साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र” के माध्यम से  उनका साहित्य प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकेंगे।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र – # २८३ ☆ 

☆ बाल गीत – खट्टी – मीठी स्वाद निराला ☆ डॉ राकेश ‘चक्र’ 

खट्टी – मीठी स्वाद निराला।

झटपट खाएँ मटकू लाला।।

नाम अनेकों इसके भइया।

इमली, अम्बा जीभ चटइया।

चटनी से खुल जाता ताला।

खट्टी – मीठी स्वाद निराला।।

 *

दही – भल्ले का स्वाद बढ़ाती।

आलू टिक्की भी गुण गाती।

चाट में चटनी गरममसाला।

खट्टी – मीठी स्वाद निराला।।

 *

कच्ची – पक्की खूब सुहाती।

सुमन, सुनीता चट कर जाती।

लटक डाल ललचाए माला।

खट्टी – मीठी स्वाद निराला।।

 *

बील, आमिला, कल्ली, खट्टा।

चटनी पीसे सिल का बट्टा।

दिल को करती है मतवाला।

खट्टी – मीठी स्वाद निराला।।

 *

कई विटामिन की है थाती।

दर्द, शुगर, पाचन में साथी।

सबका पड़ता इससे पाला।

खट्टी – मीठी स्वाद निराला।।

© डॉ राकेश चक्र

(एमडी,एक्यूप्रेशर एवं योग विशेषज्ञ)

90 बी, शिवपुरी, मुरादाबाद 244001 उ.प्र.  मो.  9456201857

Rakeshchakra00@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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