श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “संविधान…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २५० ☆
☆ # “संविधान…” # ☆
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अभी गणतंत्र दिवस हमने मनाया है
संविधान पर दृढ़ विश्वास जताया है
हमारा संविधान कितना महान है
दुनिया को हमने बताया है
यह सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय पर टिका है
हर व्यक्ति के उत्कर्ष के लिए लिखा है
अभिव्यक्ति धर्म उपासना की स्वतंत्रता है
इसका प्रभाव सारे देश में दिखा है
कुछ लोग अलगाव की बात करते हैं
धूप में बैठकर छांव की बात करते हैं
शहर में आलीशान जीवन जीते हुए
कभी-कभी गांव की बात करते हैं
भूख कितनी खूबसूरत है
रोजी-रोटी की सबको जरूरत है
जो खाली पेट निभाते हैं राष्ट्र धर्म
उनके दिलों में देश के लिए सच्ची मोहब्बत है
कुछ लोग वैचारिक गुलाम है
पथभ्रष्ट इरादों में नाकाम है
जो इसे बदलने की बात करते हैं
वह देशद्रोही है लगे हुए सुबह शाम है
संविधान को ना समझने वाले अल्प है
संविधान से ही होगा हमारा कायाकल्प है
संविधान ही हमारे जीवन का आधार है
संविधान को बचाना हमारा संकल्प है /
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© श्याम खापर्डे
फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो 9425592588
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