सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीतजीवन धारा…  

? रचना संसार # ८० – गीत – जीवन धारा…  सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ?

रुकती है कब जीवन धारा,

अविरल बहती जाती है।

समय चक्र के साथ उम्र भी,

पल पल ढलती जाती है।।

*

चीर भँवर को जीवन नैया,

नित्य भव का पार निखरे।

टकराती तूफानों से है,

बाधाओं से क्या बिखरे।।

लक्ष्य की चाह लेकर मन में,

अविरल बढ़ती जाती है।

*

रुकती है कब जीवन धारा,

अविरल बहती जाती है।।

**

सागर कितना भी गहरा हो,

नदी नहीं पर घबराती।

प्रबल वेग से मिल जाने को,

लहर -लहर वह लहराती।

चाहत की अभिलाषा हिय में,

हर पल पलती जाती है।

*

रुकती है कब जीवन धारा,

अविरल बहती जाती है।।

**

कभी राह में पत्थर मिलते,

कभी पुष्प बिछ जाते हैं।।

मिलन विरह के दौराहे पर,

मंजिल कर्मठ पाते है।

यही सोच सुख दुख धारों में,

नदिया चलती जाती है।।

*

रुकती है कब जीवन धारा,

अविरल बहती जाती है।।

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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