डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – जीवन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३१० – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – जीवन ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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चंचलता से चल रहा, मन का यह अभियान।
पागल मन ही रख रहा, केवल अपना ध्यान।।
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नैतिकता का कर रहा, मन में शुद्ध विचार।
सत्यनिष्ठ जीवन रहे, रहती शक्ति अपार।।
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लोलुपता की आग में, झुलस रहा परिवार।
जीवन अब बचता नहीं, छूट रहा संसार।।
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मौलिकता देती रही, साहित्यिक उत्थान ।
मिथ्या कब साहित्य में, पाती है सम्मान।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120, नोएडा (यू.पी )- 201307
मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





