स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”

(संस्कारधानी  जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी  को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया।  वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है, आपके काव्य संग्रह ‘शब्द नहीं रहे शब्द‘ की एक भावप्रवण कविता – आकाशवाणी।)

✍ साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २७२ – आकाशवाणी ✍

(काव्य संग्रहशब्द नहीं रहे शब्द से )

 

ये आकाशवाणी है

अब आप समाचार सुनिये ।

कल बिजली का बिल आयेगा

मकान मालिक चीखेगा

परसों बुआ आयेंगी

चिट्ठी न मिलने पर

दादा जी नाराज हैं

बहू के अस्पताल पहुँचने की

संभावना है

बउ के घुटनों में दर्द है

एम.आर.दो माह बाद मिलेगा

अगले चौबीस घंटे

मौसम खराब रहेगा

गरज के साथ छींटे पड़ेंगे।

 

© डॉ. राजकुमार “सुमित्र” 

साभार : डॉ भावना शुक्ल 

112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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