श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है सामाजिक विमर्श पर आधारित लघुकथा “आद्या कीआराधना ”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २६१ ☆
🌻लघु कथा🌻 🛕आद्या कीआराधना 🚩
बड़े भक्ति भाव से जिन कन्याओं को सिध्दी दात्री नवदुर्गा पूजन के बाद मंदिर में तामझाम के साथ कन्या भोज कराया गया था। समाज सेवक और कुछ शुभ चिंतकों की तस्वीरें दिखाई दे रही थी। लग रहा था, श्रद्धा की भावना उमड़ रही है।
आज भोर होते ही आसपास की सभी बिटिया मंदिरों पर सफाई करते नजर आई।
पान चबाते वही सब कहते जा रहे थे – – – देख वहाँ से सब साफ होना चाहिए। एक भी कचरा नही होना चाहिए।
माथे पर जय माता दी की पट्टी लगाये सभी बालिकाएं मंदिर की साफ सफाई करते भगवती को सुना रही थी–झुन झुन झननन बाजे मैय्या पाँव पैजनियांँ।
कैसी आद्या शक्ति की भक्ति।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





