श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “क्यों करें हम…?“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३७ ☆

✍ क्यों करें हम…? ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

किसी के साथ धोका क्यों करें हम

किये वादे को खोटा क्यों करें हम

 *

जो दिखता है हमेशा सच न होता

यकीं आँखों पे पूरा क्यों करें हम

 *

अगर हो बात कड़वी मौन रहते

किसी का दिल दुखाया क्यों करें हम

 *

नहीं मालूम कुछ भी अगले पल का

मिलेंगे फिर ये वादा क्यों करें हम

 *

मुहब्बत दो दिलों का मामला है

जहां भर से ये साँझा क्यों करें हम

 *

सुधरने का उसे दो एक मौका

गिराकर घर सताया क्यों करें हम

 *

किराएदार हैं सब चार दिन के

जहां में तेरा मेरा क्यों करें हम

 *

रुलाती हैं हमेशा जब भी आतीं

तेरी यादों का पीछा क्यों करें हम

 *

सितम की इंतहा ख़ातून पर ये

कभी सोचें हलाला क्यों करें हम

 *

जो दे खैरात उसकी बढ़ती दौलत

है सच फिर भी खसारा क्यों करें हम

 *

ठिकाना है नहीं इसके अलावा

तो फिर दुनिया से तौबा क्यों करें हम

 *

पड़ोसी धर्म जो नादान भूला

सितम उसके गवारा क्यों करें हम

न सीधा पूछ सा कुत्ते की हो वो

बता मेहनत को जाया क्यों करें हम

 *

जुदा हो लें नहीं जब ख्याल मिलते

मियां बीबी का ड्रामा क्यों करें हम

 *

चमन विरसे की अपनी मिल्कियत है

तबाह अपना ठिकाना क्यों करें हम

 *

यहाँ जब काम भोले पन से चलता

अरुण खुद को सियाना क्यों करें हम

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

सिरThanks मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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