श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # १९० ☆

☆ मुक्तक ।। नव वर्ष तेरा बार-बार अभिनंदन करना है ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

विधा।।।।

= 1 =

नववर्ष तेरा बार-बार अभिनंदन करना है।

तुझकोअब पीड़ा दर्द हर मन से हरना है।।

करनीआलोकित धरा नवप्रभात किरणों से।

किसी महामारी से अब और नहीं डरना है।।

= 2 =

हर मन में तुझको भाव सदभाव भरना है।

भाव घृणा का तुझको अब नष्ट करना है।।

अहम नहीं  अहमियत का विचार जगाना।

मानवता को सदा लिए जीवित रखना है।।

= 3 =

शत्रु  की हर ललकार का उत्तर धरना है।

हर निर्बल निर्धन की भी झोली भरना है।।

विश्व में भारत मस्तक करना ऊंचा और।

हर दिल से निकालना प्रेम का झरना है।।

= 4 =

हे नववर्ष नारी समता   का पाठ पढ़ना है।

नैतिक शिक्षा प्रसार और अधिक करना है।।

मां भारती चरणोंअलख जलानी देशप्रेम की।

प्रकृति का दामन भी हरियाली से भरना है।।

= 5 =

नववर्ष आशायों का दामनऔर भरना है।

नई-नई चुनौतियों से अभी और लड़ना है।।

जन-जन के सपनों में   भी भरना है रंग।

नववर्ष तेरा बार-बार अभिनंदन करना है।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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