श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘सर- ए- आईना…‘।)
☆ शशि साहित्य # ७ ☆
कविता – सर- ए- आईना… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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तू है तो बरस के सारे, मौसम पर हक मेरा है..
यह खुशियां मेरी, सारे रंगीन नज़ारे मेरे हैं..
जगमगा रहा है तारों से,
यह लहराता हुआ, आंचल मेरा है..
तितलियां कर रही अठखेलियाँ,
फूलों से महकता गुलशन मेरा है..
खुद को तलाशने निकली,
सही राह वो मेरी है..
साथ तेरे, मेरा हुआ तो,
धुंधलके सारे खो गए,
उगता हुआ ये, नया आफताब मेरा है..
वार दिया तुझ पर हर पल,
अक्षय ज्योत सा प्रेम है मेरा..
बेखौफ होकर हर बात कह सकूं,
कोई और नहीं, यह “अक्स ” है मेरा…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





