श्री एस के कपूर “श्री हंस”

 

☆ “श्री हंस” साहित्य # १९१ ☆

☆ मुक्तक।। नूतन नवीन वर्ष संदेश देता कुछ नया करने का ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

=1=

किसी की हार किसी की जीत होती है।

कुछ दोस्तों की जगह पाती नए मीत है।।

नई बात नया अंदाज  रखो नए साल में।

भरो मन प्रेम से जो रहे  न बिन प्रीत है।।

=2=

नववर्ष खत्म न हो ये तो जीवन गीत है।

प्रेम की धुन बनाओ   जीवन संगीत है।।

नव संकल्प का आगाज  हो नए साल में।

चलना साथ समय के यही   सही रीत है।।

=3=

अतीत नहीं भविष्य का दर्पण है नया साल।

नए विचारों नव   उत्साह सा है विशाल।।

जीवन ने दिया एक और मौका नए साल सा।

नववर्ष में सोचना चाहिए कुछ नए ख्याल।।

=4=

उम्र का वर्ष कम  नहीं  अनुभव बढ़ा है।

उत्साह का  पैमाना और  ऊपर चढ़ा है।।

नया साल पैगाम देता कुछ नया करने का।

वो ही जीता मुश्किलों सामने रहता खड़ा है।।

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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