श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “भारत की है शान, वंदेमातरम। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # २१६ ☆

☆ भारत की है शान, वंदेमातरम… ☆ श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” ☆

भारत की है शान, वंदेमातरम।

बंकिम जी का गान वंदेमातरम।।

 *

गोरों से लड़ी लड़ाई थी सबने।

आजादी का ज्ञान वंदेमातरम।।

 *

गाथाएँ बलिदानों की भरी हुईं।

जनता की अब तान, वंदेमातरम।।

 *

गांधी सुभाष आजाद भगत नारा।

स्वतन्त्रता बलिदान, वंदेमातरम।।

 *

झुका न पाया कभी तिरंगा कोई।

रखे हथेली जान, वंदेमातरम।।

 *

परिवर्तन आंदोलन का शस्त्र बने।

इस पर अब अभिमान, वंदेमातरम।।

 *

सैनिक कर्ज चुकाएँगे सीमा पर

कर्तव्यों का भान, वंदेमातरम।।

 *

राष्ट्रभक्ति की अलख जगाएंगे हम।

गाएंगे सब गान, वंदेमातरम।।

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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