श्री हेमंत तारे 

श्री हेमन्त तारे जी भारतीय स्टेट बैंक से वर्ष 2014 में सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्ति उपरान्त अपने उर्दू भाषा से प्रेम को जी रहे हैं। विगत 10 वर्षों से उर्दू अदब की ख़िदमत आपका प्रिय शग़ल है। यदा- कदा हिन्दी भाषा की अतुकांत कविता के माध्यम से भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त किया करते हैं। “जो सीखा अब तक,  चंद कविताएं चंद अशआर”  शीर्षक से आपका एक काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुका है। आज प्रस्तुत है आपकी एक कविता – खामोश गूँज।)

☆ हेमंत साहित्य # ६१ ☆

✍ खामोश गूँज… ☆ श्री हेमंत तारे  

कोई नहीं सीखाता

खामोशियों को पढना

यां कि

उन्हें सुनना, समझना, सुलझाना |

 

खामोशियों का होता है

स्वरचित व्याकरण, गणित

और

हिज्जों का खेल,

जो आ ही जाता है

हर किसी को, देर – सबेर

जीवन पाठशाला के

मुडे – तुडे पन्नों में सिमटे पाठों से

जिन्हें बार – बार पढा जाते हैं

जाने अन्जाने में,

गुरू घंटाल बहुतेरे |

 

© श्री हेमंत तारे

मो.  8989792935

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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