डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – इंतजार।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३२८ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – इंतजार ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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खिड़की से नित झाँकती, नई नवेली नार ।
सपने मन में सज रहे, चलती मधुर बयार ।।
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आकर खिड़की पर दिखी, उसकी मधु मुस्कान।
मन में उसके जग रहे, नये-नये अरमान।।
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नयन निहारे प्यार से, देख रही है राह।
आ जाओ मेरे सजन, बस इतनी-सी चाह।।
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रस्ता उनका देखती, कब आओगे श्याम।
इंतजार होता नहीं, मिले नहीं आराम।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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