श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “कोजागिरी…”।) 

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २८५ ☆

☆ # “कोजागिरी…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

☆

मौसम ने ली अंगड़ाई है

शरद पूर्णिमा की रात आई है

ठंडी ठंडी चल रही पुरवाई है

कायनात पर शुभ्र चांदनी छाई है

 

हल्की-हल्की ठंड मन को भा रही है

देह में नए प्राण ला रही है

उपवन से मदमस्त गंध आ रही है

कोयल कहीं दूर गा रही है

 

उपासक कर रहे हैं धम्म का उपवास

बिना लिए एक भी दिन अवकाश

अर्पित कर दी है धम्म को अपनी सांस

शरद पूर्णिमा को ही टूटेगा ऊनका वर्षावास

 

लीन है भक्ति में सारे भक्त

रख रहे हैं कोजागिरी का व्रत

छुपा है भक्ति में सदियों का सत्

मान्यता है आज बरसता है गगन से अमृत

 

धरा पर पड़ रही है चंद्रमा की 16 कलाएं

चांदनी हर रही है भक्तों की बलाएं

“खीर” चंद्र किरणों में घुलती जाएं

जागकर भक्त कोजागिरी मनाऐं /

☆

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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